बदायूं में भाजपा के पूर्व विधायकों का सपा में शामिल होना: 2027 चुनाव की तैयारी
बदायूं में राजनीतिक हलचल
बदायूं : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत दल-बदल की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। सोमवार को बदायूं में भाजपा को एक बड़ा झटका लगा, जब पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर ने समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने का निर्णय लिया। इस अवसर पर सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में दोनों नेताओं को सदस्यता दिलाई। इस कार्यक्रम में शिवपाल सिंह यादव और बदायूं के सांसद आदित्य यादव भी उपस्थित थे। इसके अलावा, दातागंज क्षेत्र से केसी शाक्य भी अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए।
सिनोद शाक्य की नाराजगी का कारण
सिनोद शाक्य, जो दातागंज सीट से 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी के विधायक रह चुके हैं, ने पहले सपा का दामन थामा था, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। उन्हें भाजपा में उचित सम्मान न मिलने और दातागंज से टिकट की मांग को लेकर नाराजगी थी।
कुशाग्र सागर, जो बिसौली से पूर्व विधायक हैं, ने भी भाजपा में 11 साल बिताए और हाल ही में पार्टी से इस्तीफा दिया था। पिछले विधानसभा चुनाव में उनकी हार के बाद भाजपा से उनकी नजदीकियां कम हो गई थीं।
सपा को चुनाव में लाभ की उम्मीद
दो पूर्व विधायकों के सपा में शामिल होने से बदायूं में पार्टी संगठन को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है। सपा जिलाध्यक्ष का मानना है कि इन नेताओं के जुड़ने से आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को लाभ होगा।
अन्य नेताओं का सपा में शामिल होना
सपा मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने लगभग 20 नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। इनमें अमेरिका से आईं सबीना परवीन, मेरठ के बसपा नेता दारा सिंह प्रजापति और पूर्व IAS अधिकारी राम बहादुर पासी शामिल थे। राम बहादुर पासी को बसपा शासनकाल में मायावती का करीबी माना जाता था। इस कार्यक्रम में पांच जरूरतमंद महिलाओं को नए घरों की चाबियां भी सौंपी गईं। इसके साथ ही, गरीब परिवारों के लिए मकान बनाने वाले मंतोष यादव को भी सम्मानित किया गया।
