80वां स्वतंत्रता दिवस: हिंदी सिनेमा की पहली देशभक्ति फिल्म 'जन्मभूमि'
80वां स्वतंत्रता दिवस: एक ऐतिहासिक पल
80वां स्वतंत्रता दिवस: आज 15 अगस्त को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर देशभक्ति की भावना हर किसी के दिल में उमड़ती है। बॉलीवुड में भी कई देशभक्ति फिल्में समय-समय पर रिलीज होती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसी फिल्मों की शुरुआत आजादी से कई साल पहले हो चुकी थी? 1936 में आई फिल्म 'जन्मभूमि' को हिंदी सिनेमा की पहली देशभक्ति फिल्म माना जाता है, जो 15 अगस्त 1947 से लगभग 11 साल पहले बनी थी।
हिंदी की पहली देशभक्ति फिल्म का निर्देशन
अंग्रेजों ने बनाई थी हिंदी की पहली देशभक्ति फिल्म
दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का निर्देशन जर्मन फिल्मकार फ्रांज ओस्टेन ने किया था। बॉम्बे टॉकीज के बैनर तले बनी इस फिल्म में उस समय के प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार और देविका रानी ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। फिल्म का संगीत सरस्वती देवी ने तैयार किया, जिन्होंने इसे यादगार धुनें दीं।
फिल्म की कहानी का सार
जानें क्या थी फिल्म की कहानी
इस फिल्म की कहानी डॉ. अजय कुमार घोष के इर्द-गिर्द घूमती है। अपने करीबी मित्र की अचानक मृत्यु के बाद अजय का दृष्टिकोण बदल जाता है। वह शहर की सुखद जिंदगी छोड़कर अपने गांव लौट आता है, जहां वह गरीब और बीमार लोगों का इलाज करने लगता है। यह फिल्म केवल राजनीतिक नारों या युद्ध की कहानी नहीं बताती, बल्कि यह दर्शाती है कि अपनी जन्मभूमि और उसके लोगों की सेवा करना ही सच्ची देशभक्ति है।
कहानी में एक खूबसूरत प्रेम कहानी भी है। अजय की प्रेमिका प्रतिमा (देविका रानी) उसे गांव जाने से रोकने की कोशिश करती है, लेकिन बाद में वह भी गांव पहुंचकर उसके काम में मदद करती है। अजय गांव में केवल मरीजों का इलाज नहीं करता, बल्कि वह अंधविश्वास, कुरीतियों और जातिभेद के खिलाफ भी आवाज उठाता है। इस प्रकार, फिल्म सामाजिक सुधार का संदेश भी देती है।
देशभक्ति का पहला गीत
पर्दे पर गूंजा था आजादी का पहला गीत
फिल्म का सबसे यादगार हिस्सा इसका गाना 'जय जय जननी जन्मभूमि' है। यमुना स्वरूप कश्यप द्वारा लिखित इस गीत को हिंदी सिनेमा का पहला पूरा देशभक्ति गाना माना जाता है। आजादी की लड़ाई के दौरान यह गाना लोगों की जुबान पर चढ़ गया था और यह क्रांतिकारियों तथा आम जनता में जोश भरने का कार्य करता था।
'जन्मभूमि' ने यह साबित किया कि देशभक्ति केवल बड़े भाषणों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सेवा और समाज सुधार में भी निहित होती है। आज 80वें स्वतंत्रता दिवस पर इस पुरानी फिल्म को याद करना हमें यह याद दिलाता है कि हिंदी सिनेमा ने आजादी से पहले ही देशप्रेम का बीज बो दिया था।
