आर. माधवन ने करियर में बर्नआउट से उबरने की कहानी साझा की
आर. माधवन का करियर बर्नआउट
मुंबई। बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता आर. माधवन ने अपने करियर के उस समय को याद किया जब सफलता के बावजूद उनके अंदर काम के प्रति उत्साह कम होने लगा था। उन्होंने बताया कि लगभग 40 वर्ष की आयु में उन्हें यह एहसास हुआ कि वह बिना किसी जोश के केवल काम कर रहे थे, और इस बदलाव को सबसे पहले उनकी पत्नी सरिता ने देखा। एक साक्षात्कार में माधवन ने कहा कि उस समय उनके करियर में सब कुछ सही चल रहा था। उन्हें फिल्में मिल रही थीं और काम भी लगातार हो रहा था, लेकिन नई कहानियों के प्रति जो उत्साह पहले था, वह धीरे-धीरे समाप्त हो गया। सुबह जल्दी उठकर सेट पर जाने की बेचैनी भी खत्म हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि इस बदलाव की ओर सबसे पहले उनकी पत्नी सरिता ने ध्यान दिलाया।
सफलता के बीच खो गया था जुनून
माधवन ने कहा कि वह अपने करियर के एक ऐसे मोड़ पर थे, जहां न तो कोई बड़ी असफलता थी और न ही कोई असाधारण सफलता। सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन वह अंदर से ऑटोपायलट मोड में चले गए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक ऐसा कम्फर्ट जोन था जिसने धीरे-धीरे उनके अंदर की भूख और संघर्ष की भावना को कमजोर कर दिया।
पैसों ने खत्म कर दिया था डर
अभिनेता ने बताया कि उस समय फिल्मों के अलावा विज्ञापनों, कॉर्पोरेट इवेंट्स, सार्वजनिक उपस्थिति और भाषणों से उनकी अच्छी कमाई हो रही थी। इससे उनकी आर्थिक चिंताएं समाप्त हो गई थीं। उनका कहना है कि जब डर खत्म हो जाता है, तो आगे बढ़ने की भूख भी कम हो जाती है, और उनके साथ भी यही हुआ।
खुद ही लिया बड़ा फैसला
माधवन ने बताया कि उन्होंने अपनी स्थिति को बदलने के लिए खुद ही एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने विज्ञापनों और अन्य व्यावसायिक कामों से दूरी बना ली ताकि फिर से असुरक्षा और संघर्ष का अनुभव कर सकें। उनके अनुसार, वह फिर से वही घबराहट महसूस करना चाहते थे, जो किसी कलाकार को बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। आर. माधवन ने कहा कि 2011 से 2015 के बीच का चार साल का समय उनके जीवन का सबसे बड़ा “रियलिटी चेक” साबित हुआ। इसी समय ने उन्हें खुद को समझने, अपनी प्राथमिकताएं तय करने और एक कलाकार के रूप में नई ऊर्जा के साथ लौटने का अवसर दिया। उनके अनुसार, उसी अनुभव ने उन्हें आगे के सफर के लिए पहले से अधिक मजबूत बनाया।
