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आर माधवन ने दुबई में बसने की वजह बताई

आर माधवन ने दुबई में बसने का निर्णय अपने बेटे वेदांत के तैराकी करियर को आगे बढ़ाने के लिए लिया। उन्होंने कोविड-19 के दौरान इस कदम को उठाया, जब भारत में स्विमिंग पूल बंद थे। माधवन ने दुबई की प्रशंसा की और अपने भारतीय संबंधों को बनाए रखने की बात की। वेदांत की सफलता ने परिवार को नई दिशा दी है। जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में और भी।
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आर माधवन का दुबई में शिफ्ट होने का कारण


आर माधवन का दुबई में शिफ्ट होना: बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता आर माधवन ने खुलासा किया है कि उन्होंने दुबई में बसने का निर्णय क्यों लिया। कोविड-19 महामारी के दौरान, उनका परिवार मुख्य रूप से बेटे वेदांत के तैराकी करियर को आगे बढ़ाने के लिए वहां चला गया। माधवन ने हाल ही में एक साक्षात्कार में बताया कि यह कदम बेटे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था।


दुबई में बसने का निर्णय

माधवन ने कहा, 'वेदांत भारत में तैराकी की ट्रेनिंग ले रहा था, लेकिन कोविड के कारण सभी स्विमिंग पूल बंद हो गए। मैंने पहले पढ़ा था कि 9 से 15 साल की उम्र में बच्चों का विकास तेजी से होता है। इस दौरान उन्हें सही व्यायाम और पोषण की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्यवश, वेदांत का विकास स्पर्ट कोविड के समय आया। हमने भारत में बहुत प्रयास किए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अंततः मेरी पत्नी सरिता ने कहा कि दुबई में पूल खुले हैं। अगस्त 2020 में वह वेदांत को लेकर दुबई चली गईं, और मैं बाद में काम खत्म करके वहां पहुंचा।


वेदांत की सफलता

वेदांत ने दुबई में कड़ी मेहनत की और भारत के लिए मेडल जीतना शुरू कर दिया। माधवन ने खुशी से कहा, 'हमें यहां चार साल हो गए हैं और मैं बहुत आभारी हूं।'


दुबई की प्रशंसा

आर माधवन ने दुबई की तारीफ करते हुए कहा, 'दुबई शायद दुनिया का सबसे अद्भुत शहर है। यहां की सुरक्षा, जीवन की गुणवत्ता, भोजन और बुनियादी ढांचा सभी को आकर्षित करते हैं। सड़कें साफ हैं और हर पौधे की देखभाल की जाती है।' उन्होंने शहर की दूरदर्शिता की भी सराहना की।


माधवन ने भारत से अपने संबंध को मजबूत बनाए रखने की बात भी की। उन्होंने कहा, 'मेरे सभी टैक्स भारत में भरे जाते हैं। मैं पहले भारतीय हूं और हमेशा रहूंगा।' इसके अलावा, उन्होंने दुबई में कैप्टन का लाइसेंस भी प्राप्त किया है।


नया व्यवसाय

नया बिजनेस प्लान: अभिनेता अब दक्षिण भारतीय फिल्टर कॉफी का एक नया वेंचर शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि वे भारतीय स्वाद को दुबई में भी लोकप्रिय बनाने का प्रयास कर रहे हैं।


हालांकि माधवन का परिवार अब दुबई में बस चुका है, लेकिन उनका दिल अभी भी भारत में है। वेदांत की सफलता देखकर माधवन का चेहरा खिल उठता है। कोविड जैसी कठिनाई में लिया गया यह निर्णय न केवल वेदांत के करियर को संवारने में मददगार साबित हुआ, बल्कि पूरे परिवार को नई दिशा भी दी।