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आराध्या बच्चन ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की याचिका, झूठी खबरों के खिलाफ उठाई आवाज

आराध्या बच्चन, अभिषेक और ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी, ने दिल्ली हाईकोर्ट में झूठी खबरों के खिलाफ याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान, जस्टिस अनूप जे भंभानी ने महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाए, जबकि बच्चन परिवार के वकील ने उनकी प्रतिष्ठा की सुरक्षा की मांग की। कोर्ट ने पहले भी यूट्यूब चैनलों को आराध्या के स्वास्थ्य के बारे में गलत जानकारी फैलाने से रोका था। इस मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।
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आराध्या बच्चन की याचिका का मामला

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन की बेटी आराध्या बच्चन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। वर्ष 2023 में, आराध्या ने अपने स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी झूठी सूचनाओं के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने अपने अधिकारों और निजता की सुरक्षा की मांग की। अब इस मामले की सुनवाई के दौरान, दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठाए हैं।


दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई में टिप्पणियाँ

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, सुनवाई के दौरान जस्टिस अनूप जे भंभानी ने कहा कि किसी उत्पाद या सेवा का नाम और मूल्य ट्रेडमार्क से संबंधित होते हैं, लेकिन व्यक्ति के मामले में यह स्थिति भिन्न होती है। जस्टिस भंभानी ने यह सवाल उठाया कि यदि किसी परिवार के नाम और प्रतिष्ठा को ट्रेडमार्क की तरह माना जाए, तो यह प्रतिष्ठा आने वाली पीढ़ियों तक कितनी दूर तक जाती है? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी विशेष उपनाम की पहचान और मान्यता अगली पीढ़ियों को अपने आप मिल जाती है, और यदि हां, तो इसकी सीमाएँ क्या हैं?


बच्चन परिवार के वकील की दलील

बच्चन परिवार की ओर से वकील प्रवीण आनंद ने अदालत में तर्क दिया कि परिवार की प्रतिष्ठा और नाम का गलत उपयोग या नुकसान पहुंचाने की कोशिशों पर रोक लगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यूट्यूब पर परिवार की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और बच्चन नाम को झूठी खबरों से जोड़ा जा रहा है, जिससे परिवार की छवि को नुकसान पहुंच रहा है।


कोर्ट का पूर्व का निर्णय

इससे पहले, 20 अप्रैल 2023 को, हाईकोर्ट ने कई यूट्यूब चैनलों को आराध्या के स्वास्थ्य के बारे में गलत जानकारी फैलाने से रोकने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में ऐसी झूठी बातें फैलाना बेहद खराब मानसिकता को दर्शाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गूगल को अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री को बढ़ावा नहीं देना चाहिए और हर बच्चे को सम्मान के साथ जीने का पूरा अधिकार है। इस मामले की अगली सुनवाई अब सितंबर में होगी।