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इविल डेड बर्न: एक निराशाजनक हॉरर अनुभव

इविल डेड बर्न एक ऐसी हॉरर फिल्म है जो खून-खराबे की अधिकता के बावजूद दर्शकों को प्रभावित करने में असफल रहती है। इस फिल्म में कहानी की कमी और कमजोर पात्रों का जिक्र है, जो इसे एक निराशाजनक अनुभव बनाते हैं। जानें इस फिल्म की विशेषताएँ और क्या यह दर्शकों को डराने में सफल होती है या नहीं।
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एक भयावह यात्रा

यदि सिनेमा में इंसानों को बेरहमी से काटने और तड़पाने के अजीब तरीके खोजने की प्रतियोगिता होती, तो 'इविल डेड बर्न' निश्चित रूप से विजेता होती। फिल्म के प्रारंभिक क्षणों में ही अंगों का उड़ना, हड्डियों का टूटना और खून की बाढ़ आना शुरू हो जाता है। लेकिन एक घंटे के बाद, दर्शक इस भयावहता के प्रति संवेदनहीन हो जाते हैं और बस इस तबाही के अंत की प्रतीक्षा करने लगते हैं।


फ्रैंचाइज़ी का असली मिजाज खो गया

'इविल डेड' श्रृंखला की फिल्में कभी भी शालीनता से भरी नहीं रही हैं। सैम राइमी की क्लासिक फिल्मों की पहचान ही थी—अत्यधिक खून-खराबा, बुरी आत्माओं की भद्दी बातें और अद्भुत डार्क ह्यूमर। पहले की फिल्मों में जब किसी को चेनसा से काटा जाता था, तो वह एक मजेदार हॉरर अनुभव होता था। लेकिन 'इविल डेड बर्न' ने इस मजाक और मिजाज को पूरी तरह से भुला दिया है।


कमजोर कहानी और बिखरी हुई प्लॉट

फिल्म की कहानी एलिस (सोहेला याकूब) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने दिवंगत पति के परिवार से मिलने एक सुनसान घर जाती है। यहाँ एक रहस्यमयी अटारी और डरावना अतीत है, लेकिन फिल्म अपनी अनूठी 'माइथोलॉजी' को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती है। दर्शकों को यह समझने में कठिनाई होती है कि ये राक्षसी ताकतें कैसे वापस आईं।


हिंसा की अधिकता, लेकिन हॉरर की कमी

फिल्म तकनीकी दृष्टि से उत्कृष्ट है, लेकिन हर दृश्य में खून-खराबा बढ़ाने की कोशिश की गई है। जो लोग 'स्लैशर' या 'गोर' सिनेमा के प्रशंसक हैं, उनके लिए यह आनंददायक हो सकता है, लेकिन आम दर्शकों के लिए यह थका देने वाला अनुभव बन जाता है।


परफॉर्मेंस और डेडाइट्स की कमी

मुख्य अभिनेत्री सोहेला याकूब ने अपने किरदार में भावनाएं लाने की कोशिश की है, लेकिन वह ज्यादातर समय सदमे में ही नजर आती हैं। इस बार के 'डेडाइट्स' भी अधूरे लगते हैं, जो सिर्फ चीखने-चिल्लाने वाली मशीनों में बदल गए हैं।


विजुअल्स और प्रैक्टिकल इफेक्ट्स

फिल्म में कुछ बेहतरीन दृश्य हैं, खासकर जब यह डराने की कोशिश छोड़कर थ्रिल पैदा करती है। कार वाला एक्शन सीक्वेंस कहानी में तनाव लाता है। निर्देशक ने कुछ शानदार 'लॉन्ग टेक्स' फिल्माए हैं, जो उनके विजुअल कौशल को दर्शाते हैं।


निष्कर्ष

'इविल डेड बर्न' कुछ नए डर जरूर देती है, लेकिन यह फिल्म फ्रैंचाइज़ी के मूल सिद्धांत को भूल गई है—सिर्फ घिनौना होना ही मनोरंजक नहीं होता।


रेटिंग

2/5 स्टार