कंगना रनौत ने अपने विचारों में बदलाव पर दी प्रतिक्रिया
कंगना रनौत की नई बयानबाजी
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और भाजपा की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में उन्होंने नई पीढ़ी के बारे में अपने विचार साझा किए, जिसके बाद उनके पुराने पार्टी और फिल्म प्रचार से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगे। इस बीच, सीजेपी के सौरव दास के साथ उनकी बातचीत भी सुर्खियों में रही। अब कंगना ने इन सभी मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
पुराने वीडियो पर कंगना का स्पष्टीकरण
कंगना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि जो लोग उनके पुराने वीडियो साझा कर रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि हर व्यक्ति को समय के साथ अपनी सोच बदलने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद की विचारधारा या धर्म चुनने की स्वतंत्रता देता है, और इसी तरह उन्हें भी अपने विचार और जीवन का मार्ग चुनने का पूरा अधिकार है।
पुराने जीवन पर सफाई नहीं देंगी
कंगना ने स्पष्ट किया कि वह अपने अतीत के बारे में किसी भी प्रकार की सफाई नहीं देंगी। उन्होंने कहा कि पहले उनकी सोच अलग थी, लेकिन अब यदि वह अपनी विचारधारा में बदलाव करना चाहती हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उनके अनुसार, हर व्यक्ति समय के साथ विकसित होता है और उसे अपने निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
भाजपा और आरएसएस की विचारधारा को अपनाने की इच्छा
वीडियो में कंगना ने कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को अपनाना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक जागरूक और अनुशासित हिंदू के रूप में जीवन जीना चाहती हैं। कंगना ने सवाल उठाया कि यदि अन्य लोग अपनी पहचान और विचार बदल सकते हैं, तो उन्हें ऐसा करने से क्यों रोका जाए।
दोहरी सोच पर सवाल उठाए
कंगना रनौत ने यह भी कहा कि समाज हिंदू बेटियों के प्रति दोहरा व्यवहार करता है। उनका कहना था कि लोग उनके कई साल पुराने वीडियो दिखाकर आज भी उन्हें उसी नजर से देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह अब अपने विचार बदलकर एक नया रास्ता अपनाना चाहती हैं, तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
हर बेटी को अपनी सोच चुनने का अधिकार
अपने बयान के अंत में कंगना ने कहा कि हर बेटी को अपनी सोच और विचारधारा चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई जागरूक और अनुशासित हिंदू बनना चाहता है, तो उसे भी वही अधिकार मिलने चाहिए जो समाज अन्य लोगों को देता है।
