गंगाराम: बेमेतरा के मगरमच्छ की अनोखी कहानी अब NCERT में शामिल
गंगाराम की कहानी
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में इंसान और वन्यजीवों के बीच एक अनोखा प्रेम और विश्वास का उदाहरण देखने को मिला है, जो अब बच्चों की पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाएगा। बावा मोहतरा गांव में रहने वाले एक मगरमच्छ, जिसका नाम 'गंगाराम' है, की कहानी को NCERT ने अपने पाठ्यक्रम में स्थान दिया है।
130 वर्षों का संबंध
गांववासियों का कहना है कि गंगाराम लगभग 130 वर्षों तक गांव के तालाब में रहा और इस दौरान उसने कभी किसी ग्रामीण या उनके मवेशियों को नुकसान नहीं पहुँचाया। बच्चे तालाब में तैरते थे और महिलाएं पानी भरने आती थीं। ग्रामीणों के अनुसार, गंगाराम एक शाकाहारी और शांत स्वभाव का था, और उसे इंसानों की संगति पसंद थी।
गंगाराम की मृत्यु पर शोक
2019 में जब गंगाराम की प्राकृतिक कारणों से मृत्यु हुई, तो पूरा बावा मोहतरा गांव शोक में डूब गया। ग्रामीणों ने उसकी शवयात्रा निकाली और पूरे रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया। उस दिन गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला, और उसकी याद में तालाब के किनारे एक स्मारक भी बनाया गया।
NCERT पाठ्यक्रम में शामिल
इस मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व के अद्वितीय उदाहरण को अब NCERT की किताबों में 'My India! – A Bond Between Humans and Animals' शीर्षक के तहत शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता सिखाना है।
