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गुरु पूर्णिमा: 182 देशों में श्रद्धालुओं ने मनाया वैश्विक उत्सव

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर, 182 देशों में करोड़ों श्रद्धालुओं ने एक वैश्विक कृतज्ञता उत्सव का आयोजन किया। इस दिन, गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने अपने अनुयायियों को जीवन में आनंद और ज्ञान का उपहार देने के लिए श्रद्धा पूर्वक नमन किया। समारोह में ध्यान, भक्ति संगीत और गुरु पूजा का आयोजन किया गया, जिसने सभी को भक्ति और श्रद्धा से अभिभूत कर दिया। यह उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए एक आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है।
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गुरु पूर्णिमा का वैश्विक उत्सव

नई दिल्ली: एशिया, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और भारत समेत 182 देशों में विभिन्न आस्थाओं और संस्कृतियों से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक वैश्विक कृतज्ञता उत्सव का आयोजन किया। इस दिन, श्रद्धालुओं ने गुरु-तत्त्व और आध्यात्मिक आचार्यों की परंपरा को श्रद्धा पूर्वक नमन किया और गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने उन्हें जीवन में आनंद और ज्ञान का अमूल्य उपहार दिया।
गुरुदेव ने अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के बून आश्रम से इस समारोह का नेतृत्व किया। इस अवसर पर 182 देशों के श्रद्धालु प्रत्यक्ष रूप से और ऑनलाइन इस दिव्य उत्सव में शामिल हुए।
गुरुदेव ने गहन कृतज्ञता और आनंद के वातावरण में पूर्णिमा ध्यान का मार्गदर्शन किया। इसके बाद, आध्यात्मिक गुरुओं की परंपरा के सम्मान में एक सरल लेकिन भावपूर्ण गुरु पूजा का आयोजन किया गया, जिसने सभी साधकों को श्रद्धा और भक्ति से अभिभूत कर दिया।


गुरु पूर्णिमा का महत्व

गुरु पूर्णिमा के महत्व पर चर्चा करते हुए, गुरुदेव ने कहा, “गुरु केवल ज्ञान का प्रदाता नहीं, बल्कि स्वयं ज्ञान का प्रकाश है। गुरु आपकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं। वे माता, पिता, मित्र और जीवन के सच्चे सहचर होते हैं।” उन्होंने गुरु-शिष्य संबंध की विशेषता को बताते हुए कहा, “जब आपके जीवन में गुरु होते हैं, तो मुक्ति की चाह भी समाप्त हो जाती है; क्योंकि गुरु का सान्निध्य ही मुक्ति है।”
गुरुदेव ने आगे कहा, “गुरु मौन रहकर, पीछे से आपका मार्गदर्शन करते हैं। वे नेतृत्व का प्रदर्शन नहीं करते और आपको चयन की स्वतंत्रता देते हैं।”


भारत में गुरु पूर्णिमा का उत्सव

भारत में आर्ट ऑफ लिविंग के सभी केंद्रों पर विशेष गुरु पूजा, सेवा गतिविधियों और भव्य सत्संगों के माध्यम से गुरु पूर्णिमा का उल्लासपूर्वक आयोजन किया गया। देशभर के साधक बून (अमेरिका) से प्रसारित वैश्विक समारोह के लाइव प्रसारण के माध्यम से जुड़े। बेंगलुरु में, आर्ट ऑफ लिविंग अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में सौ से अधिक गुरु-पूजा पंडितों द्वारा एक गरिमामय सामूहिक पूजा का आयोजन किया गया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में तीन हजार से अधिक साधक भक्ति-रस में डूबे भजनों का आनंद ले रहे थे। कोलकाता में, आर्ट ऑफ लिविंग के निर्वाण स्टेशन पर भजन-जैमिंग ने भक्तों को आनंदित किया। श्री श्री अकादमी का सभागार भी हजारों श्रद्धालुओं से भरा हुआ था, जहाँ सभी भक्त भजनों की मधुर स्वर-लहरियों पर झूम उठे।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुरु पूर्णिमा का उत्सव

विश्वभर में आर्ट ऑफ लिविंग के केंद्रों पर ध्यान, भक्तिमय संगीत और सेवा गतिविधियों के साथ गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। मलेशिया में सैकड़ों श्रद्धालु इस उत्सव में शामिल हुए, जबकि अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में भव्य सत्संग का आयोजन किया गया। जर्मनी के बैड एंटोगास्ट में पारंपरिक गुरु पूर्णिमा समारोह आयोजित हुआ, और दक्षिण अफ्रीका में स्वयंसेवकों ने सामुदायिक सेवा कार्यों के माध्यम से इस दिन को सार्थक बनाया। नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, सिंगापुर सहित कई देशों में भी गुरु पूर्णिमा के विविध आयोजन हुए। इन समारोहों ने यह सिद्ध किया कि गुरु पूर्णिमा केवल एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सम्पूर्ण मानवता को कृतज्ञता, श्रद्धा और आध्यात्मिक एकता के सूत्र में पिरोने वाला एक वैश्विक उत्सव है।