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जलवायु परिवर्तन: नींद का दुश्मन बनता जा रहा है

हालिया अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन भारत के बड़े शहरों में नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। चेन्नई, मुंबई, और दिल्ली जैसे शहरों में रात की गर्मी के कारण लोग औसतन कई घंटे की नींद खो रहे हैं। यह समस्या न केवल थकान का कारण बन रही है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डाल रही है। जानें इस अध्ययन के परिणाम और इसके पीछे के कारण।
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नई दिल्ली में नींद की समस्या

नई दिल्ली: क्या आप रात में बार-बार जागने से परेशान हैं? क्या सुबह उठने पर आपको ऐसा लगता है कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई और शरीर थका हुआ है? अगर ऐसा है, तो इसके लिए अपनी व्यस्त दिनचर्या या तनाव को जिम्मेदार मत ठहराइए, असली कारण है 'बदलता मौसम'! जी हां, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि ये आपकी नींद को भी प्रभावित कर रही हैं। एक नई अध्ययन में यह सामने आया है कि रात के तापमान में वृद्धि भारत के बड़े शहरों में लोगों की नींद के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।


चेन्नई में नींद की कमी सबसे अधिक

रात की गर्मी और नींद के बीच के संबंध पर 'क्लाइमेट सेंट्रल' ने 2020 से 2025 के बीच 1,300 से अधिक शहरों के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इस अध्ययन के परिणाम चिंताजनक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नींद की कमी के मामले में भारत का चेन्नई शहर सबसे आगे है, जहां लोग हर साल औसतन 93 घंटे की नींद खोते हैं। इसके बाद मुंबई (84 घंटे), कोलकाता (80 घंटे) और अहमदाबाद (78 घंटे) का स्थान है। हैदराबाद में 75 घंटे, बेंगलुरु में 67, दिल्ली में 66 और पुणे में 65 घंटे की नींद हर साल कम हो रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस कमी का लगभग 5 से 8 घंटे का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है।


गर्मी से नींद की गुणवत्ता पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, गहरी नींद के लिए शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से कम होना आवश्यक है। लेकिन जब रात में तापमान बहुत अधिक होता है, तो शरीर को ठंडा करने में कठिनाई होती है। इससे न केवल नींद में देरी होती है, बल्कि रात में बार-बार जागने की समस्या भी उत्पन्न होती है। इस संतुलन के बिगड़ने से नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।


स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि रात की बढ़ती गर्मी केवल अगले दिन की थकान तक सीमित नहीं है। यदि लंबे समय तक पर्याप्त नींद नहीं मिलती है, तो इसका गंभीर प्रभाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। नींद की कमी से चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और कार्यक्षमता में कमी आ सकती है। इसके अलावा, नींद की कमी से हृदय और नसों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। दिनभर नींद की कमी और ध्यान की कमी के कारण सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।