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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी: बॉक्स ऑफिस पर परिवार की टकराहट

90 के दशक में बॉलीवुड में धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की टकराहट ने दर्शकों का ध्यान खींचा। धर्मेंद्र ने अपने बेटों के करियर को संवारने के लिए 'घायल' और 'बरसात' जैसी सफल फिल्में बनाई, जबकि हेमा ने 'दिल आशना है' के जरिए शाहरुख खान को एक बड़ा मौका दिया। जानें कैसे इन दोनों सितारों ने हिंदी सिनेमा पर गहरा प्रभाव डाला और उनके करियर की कहानी।
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90 के दशक का बॉलीवुड


90 का दशक बॉलीवुड के लिए एक महत्वपूर्ण समय था, जब हर शुक्रवार नई फिल्मों की किस्मत का फैसला करता था। इस दौरान, एक ही परिवार के दो प्रमुख सितारों का प्रोडक्शन और निर्देशन के माध्यम से बॉक्स ऑफिस पर आमना-सामना हुआ। एक तरफ थे 'ही-मैन' धर्मेंद्र और दूसरी ओर उनकी पत्नी, 'ड्रीम गर्ल' हेमा मालिनी।


धर्मेंद्र ने 'घायल' से सनी की किस्मत बदली

80 के दशक के अंत तक, धर्मेंद्र ने महसूस किया कि हिंदी सिनेमा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अपने होम प्रोडक्शन 'विजेता फिल्म्स' के माध्यम से, उन्होंने अपने बेटों सनी और बॉबी देओल के करियर को नई दिशा देने का प्रयास किया।


1990 में, सनी देओल के करियर को मजबूती प्रदान करने के लिए धर्मेंद्र ने 'घायल' का निर्माण किया। राजकुमार संतोषी द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक मुक्केबाज अजय मेहरा की कहानी है, जो अपने भाई की हत्या का बदला लेने के लिए भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ता है।


22 जून 1990 को रिलीज हुई 'घायल' का मुकाबला आमिर खान की 'दिल' से हुआ। लगभग 2.5 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भारत में लगभग 20 करोड़ रुपये का कारोबार किया और यह एक बड़ी हिट साबित हुई। फिल्म ने 7 फिल्मफेयर अवार्ड्स और एक नेशनल फिल्म अवार्ड भी जीता।


हेमा मालिनी ने शाहरुख पर लगाया दांव

सनी देओल की सफलता के बाद, हेमा मालिनी ने भी प्रोडक्शन और निर्देशन में कदम रखा। 1992 में, उन्होंने 'दिल आशना है' का निर्माण किया। यह फिल्म एक लड़की की अपनी जैविक मां की खोज के इर्द-गिर्द घूमती है।


इस फिल्म में दिव्या भारती मुख्य भूमिका में थीं, जबकि हीरो के रूप में हेमा ने टीवी पर उभरते शाहरुख खान को चुना। यह उनके करियर के शुरुआती महत्वपूर्ण मौकों में से एक था। फिल्म में जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, डिंपल कपाड़िया और अमृता सिंह जैसे कई बड़े कलाकार भी शामिल थे।


25 दिसंबर 1992 को रिलीज हुई यह फिल्म दर्शकों को खास पसंद नहीं आई। लगभग 2.5 से 3 करोड़ रुपये के बजट वाली यह फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये तक ही पहुंच सकी और असफल रही।


'बरसात' से बॉबी देओल ने मचाया धमाल

1995 में, धर्मेंद्र ने छोटे बेटे बॉबी देओल के लिए 'बरसात' पर दांव लगाया। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक-एक्शन फिल्म से ट्विंकल खन्ना ने भी डेब्यू किया।


करीब 8.25 करोड़ रुपये के बजट में बनी 'बरसात' ने लगभग 33-34 करोड़ रुपये का कारोबार किया और यह सुपरहिट रही। नदीम-श्रवण का संगीत भी इसकी सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना। 'हमको सिर्फ तुमसे प्यार है', 'लव तुझे लव मैं करता हूं' और 'नहीं यह हो नहीं सकता' जैसे गाने आज भी याद किए जाते हैं।


धर्मेंद्र और हेमा मालिनी का प्रभाव

90 के दशक में, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की राहें अलग थीं, लेकिन दोनों ने हिंदी सिनेमा पर गहरा प्रभाव छोड़ा। धर्मेंद्र ने 'घायल' और 'बरसात' के माध्यम से अपने बेटों के करियर को मजबूत किया। वहीं, 'दिल आशना है' भले ही बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, लेकिन हेमा मालिनी ने शाहरुख खान की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें एक बड़ा मौका दिया। आगे चलकर यही अभिनेता 'बॉलीवुड का बादशाह' कहलाया।