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फिल्म 'वन्स मोर': एक नई शुरुआत की कहानी

फिल्म 'वन्स मोर' एक रोमांटिक ड्रामा है जो डिप्रेशन और प्यार के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। इसमें रघुवरन की कहानी है, जो अपने अतीत से जूझ रहा है, और अंजलि, जो उसकी जिंदगी में खुशियों की किरण लाती है। फिल्म संवेदनशील मुद्दों को परिपक्वता से प्रस्तुत करती है और इसमें अद्भुत अभिनय और तकनीकी पहलू शामिल हैं। क्या रघुवरन अपने अतीत को भुलाकर एक और मौका पाएगा? जानने के लिए पढ़ें पूरी समीक्षा।
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किस्मत और दूसरे मौके की कहानी

यदि आप किस्मत में विश्वास करते हैं, तो जीवन का अर्थ है—'दूसरा मौका'। इसी विचार और उम्मीद पर आधारित है निर्देशक विग्नेश श्रीकांत की रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'वन्स मोर' (Once More)। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति के चारों ओर घूमती है जो डिप्रेशन के अंधकार में खुशियों का अर्थ भूल चुका है। जब रघुवरन की नीरस जिंदगी में खुशियों से भरी अंजलि की एंट्री होती है, तो कहानी एक नया मोड़ लेती है।


फिल्म की कहानी का सार

मुख्य पात्र रघुवरन (अर्जुन दास) पिछले आठ वर्षों से एक दुखद अतीत के साए में जी रहा है। एक पुरानी त्रासदी ने उसके प्यार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। वह खुद में सिमटा रहता है, तभी उसकी कॉलेज जूनियर अंजलि (अदिति शंकर) अचानक उसकी जिंदगी में लौट आती है।


अंजलि का प्रभाव

अंजलि का उत्साही और चुलबुला स्वभाव रघुवरन की शांत और अकेली रहने की आदत के विपरीत है। रघुवरन उसे खुद से दूर करने की हर संभव कोशिश करता है, लेकिन अंजलि का निश्छल प्यार धीरे-धीरे उसकी खामोशी की दीवार को तोड़ने लगता है। क्या रघुवरन अपने अतीत को भुलाकर अंजलि के साथ जिंदगी को 'एक और मौका' दे पाएगा? फिल्म इन्हीं संवेदनशील सवालों के जवाब खोजती है।


संवेदनशील मुद्दों पर परिपक्व दृष्टिकोण

'वन्स मोर' की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डिप्रेशन, आत्महत्या, समलैंगिक संबंध और इंटिमेसी जैसे संवेदनशील विषयों को सहजता और परिपक्वता से प्रस्तुत करती है।


बिना जजमेंट के चित्रण

फिल्म इन गंभीर मुद्दों को केवल ड्रामे या सनसनी के लिए नहीं दिखाती, बल्कि ये किरदारों की जिंदगी का एक स्वाभाविक हिस्सा लगते हैं।


नैतिक सीख से दूरी

कहानी किरदारों को अपनी भावनाएं व्यक्त करने, गलतियां करने और मदद मांगने की पूरी आजादी देती है, बिना उन पर कोई नैतिक दबाव डाले।


अभिनय और किरदारों की केमिस्ट्री

अर्जुन दास और अदिति शंकर: अर्जुन दास ने एक टूटे हुए इंसान से लेकर फिर से मुस्कुराना सीखने वाले प्रेमी के किरदार को गहराई से निभाया है। वहीं, अदिति शंकर अपनी ऊर्जावान और स्क्रीन प्रेजेंस से अंजलि के किरदार को जीवंत बना देती हैं। शुरुआत में उनका तरीका थोड़ा जोर-जबरदस्ती वाला लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे दर्शक उनकी मासूमियत से जुड़ जाते हैं।


सहायक कलाकारों का योगदान

इंद्रा और सहायक कलाकार: सोना ओलिकल (इंद्रा के रूप में) रोमांटिक और ड्रामेटिक दोनों दृश्यों में प्रभाव छोड़ती हैं। हालांकि, रघुवरन और इंद्रा के रिश्ते का अचानक खत्म होना फिल्म को थोड़ा कमजोर बनाता है। देवदर्शिनी, द्रविड़ सेल्वम और अनुषा प्रभु जैसे सहायक कलाकारों ने कहानी में आवश्यक हास्य और अपनापन जोड़ा है।


तकनीकी पहलू: संगीत और सिनेमैटोग्राफी

फिल्म के तकनीकी पहलुओं ने इसे संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:


संगीत का योगदान

हेशम अब्दुल वहाब का संगीत: फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और ट्रैक—विशेषकर 'वा कन्नाम्मा' और 'इधयम' बेहद कर्णप्रिय हैं, जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी आपके दिल में बसे रहते हैं।


सिनेमैटोग्राफी

अरविंद विश्वनाथन की सिनेमैटोग्राफी: कैमरे का काम कहानी के मूड और इमोशंस को खूबसूरती से फ्रेम करता है।


अंतिम निष्कर्ष

'वन्स मोर' निर्देशक विग्नेश श्रीकांत की एक अच्छी शुरुआत है। फिल्म में संवेदनशीलता, अपनापन और बेहतरीन परफॉर्मेंस का सुंदर मेल है। हालांकि, कुछ स्थानों पर यह जानी-पहचानी रोमांटिक-ड्रामा की लीक पर चलने लगती है, जिससे यह अपनी पूरी क्षमता को नहीं छू पाती। फिर भी, अर्जुन दास और अदिति शंकर की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री के लिए इसे एक बार जरूर देखा जा सकता है।