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बादशाह ने शोहरत की असली कीमत बताई: 'फेम एक किराए का मकान है'

रैपर बादशाह ने हाल ही में एक चैट शो में अपनी लोकप्रियता और शोहरत की असली कीमत पर विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे एक कलाकार की जिम्मेदारी बढ़ती है जैसे-जैसे उसकी पहचान बढ़ती है। बादशाह ने शोहरत को एक किराए के मकान से तुलना करते हुए कहा कि यह स्थायी नहीं होती और एक दिन इसे छोड़ना पड़ता है। जानें उनके विचारों के पीछे की गहराई और कलाकार की जिम्मेदारियों के बारे में उनकी सोच।
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बादशाह का अनोखा नजरिया

मुंबई: म्यूजिक इंडस्ट्री में रैपर बादशाह ने कई हिट गाने दिए हैं और उनकी फैन फॉलोइंग देशभर में फैली हुई है। हाल ही में, उन्होंने अभिनेता और होस्ट शेखर सुमन के चैट शो 'शेखर टुनाइट' में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने अपनी लोकप्रियता, एक कलाकार की जिम्मेदारियों और शोहरत के बारे में अपने विचार साझा किए।


बादशाह ने कहा कि जब कोई कलाकार अपने करियर की शुरुआत करता है, तो वह अपनी रचनात्मकता और जुनून के साथ आगे बढ़ता है। लेकिन जैसे-जैसे उसकी पहचान बढ़ती है, उसके शब्दों और काम का प्रभाव भी बढ़ता है। इसलिए, एक कलाकार के लिए सामाजिक जिम्मेदारी को समझना आवश्यक है।


शो में बातचीत के दौरान, उन्होंने बताया कि गाने लिखना और संगीत बनाना उनके लिए पहले एक आसान और मजेदार प्रक्रिया थी। उस समय उनका ध्यान केवल अपनी क्रिएटिविटी को लोगों तक पहुंचाने पर था, लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि उनके शब्दों का प्रभाव बहुत दूर तक जाता है।


बादशाह ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति हमेशा परेशानियों के बारे में सोचता है, तो उसे हर जगह मुश्किलें ही नजर आएंगी। लेकिन अगर वह अपने काम पर ध्यान केंद्रित करता है, तो चीजें आसान हो जाती हैं। जब आप एक लेखक या कलाकार के रूप में शुरुआत करते हैं, तो आपको यह नहीं पता होता कि आपके शब्दों को लोग कैसे समझेंगे और उनका समाज पर क्या असर पड़ेगा।'


उन्होंने आगे कहा, 'किसी भी कला को देखने और समझने का नजरिया हर व्यक्ति का अलग होता है। हो सकता है कि किसी गाने को अधिकांश लोग पसंद करें, लेकिन कुछ को वही चीज आपत्तिजनक लग सकती है। इसलिए, जैसे-जैसे किसी कलाकार का दायरा बढ़ता है, उसे अपने काम और शब्दों के प्रति अधिक सजग रहना पड़ता है।'


बादशाह ने यह भी कहा, 'एक कलाकार की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उसकी सामाजिक जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। पहले जहां उसका काम सीमित लोगों तक पहुंचता था, वहीं अब उसकी कला लाखों लोगों तक पहुंचने लगती है। ऐसे में कलाकार को यह समझना जरूरी है कि उसकी कही गई बातों का प्रभाव क्या हो सकता है।'


उन्होंने कहा, 'यह जिम्मेदारी अपने आप में एक चुनौती है, लेकिन इसी चुनौती में एक कलाकार के लिए असली मजा भी छिपा होता है। उसे अपनी रचनात्मकता और प्रभाव को बनाए रखना पड़ता है।'


बातचीत के दौरान, बादशाह ने शोहरत के बारे में भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि शोहरत हमेशा स्थायी नहीं होती और किसी कलाकार को इसे अपनी पहचान नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने इसे किराए के मकान से तुलना करते हुए कहा कि यह कुछ समय के लिए मिलती है और एक दिन इसे छोड़ना पड़ता है।'


बादशाह ने कहा, 'फेम एक किराए का मकान है। इसे एक दिन खाली करना होगा। इसे पाकर आनंद लें, लेकिन इस पर खुद को ज्यादा खर्च न करें। यह किराए का मकान है, आपको इसे छोड़ना पड़ेगा।'