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मेघना गुलज़ार की 'दायरा': न्याय प्रणाली पर एक गंभीर टिप्पणी

मेघना गुलज़ार की नई फिल्म 'दायरा' समाज के संवेदनशील मुद्दों को उजागर करती है, जिसमें न्याय प्रणाली और महिला सुरक्षा के पहलुओं पर गहराई से चर्चा की गई है। करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के अभिनय से सजी यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। क्या यह एनकाउंटर वास्तव में आत्मरक्षा में हुआ था या यह एक फर्जी एनकाउंटर था? फिल्म में कई ऐसे सवाल हैं जो दर्शकों के मन में उठते हैं। जानिए इस फिल्म की कहानी और इसके संदेश के बारे में।
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समाज के छुपे पहलुओं को उजागर करती 'दायरा'

मेघना गुलज़ार की फिल्में हमेशा उन संवेदनशील मुद्दों को सामने लाती हैं, जिन पर चर्चा करने से अक्सर परहेज किया जाता है। 'राज़ी', 'तलवार' और 'छपाक' जैसी गंभीर कहानियों के बाद, मेघना अब 'दायरा' लेकर आई हैं। करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन के साथ, यह फिल्म भारतीय न्याय प्रणाली, पुलिस के व्यवहार, त्वरित न्याय की चाहत और महिला सुरक्षा के बीच के कड़वे सच को उजागर करती है।


फिल्म की कहानी का सार

फिल्म की शुरुआत एक नाटकीय मोड़ से होती है। DCP रमन कुमार (पृथ्वीराज सुकुमारन) और उनकी एनकाउंटर टीम को जनता द्वारा सराहा जा रहा है। उनकी टीम ने 24 वर्षीय रागिनी पुजारी के साथ हुई बर्बरता के चार आरोपियों को एक कथित पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया है। जबकि जनता और मीडिया में जश्न का माहौल है, कानून के गलियारों में सन्नाटा है। यह सवाल उठता है—क्या यह एनकाउंटर वास्तव में आत्मरक्षा में हुआ था या यह एक सुनियोजित फर्जी एनकाउंटर था?


कहानी में नया मोड़

कहानी में DCP अजूनी कोहली (करीना कपूर खान) की एंट्री होती है, जिन्हें इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जब अजूनी अपनी टीम के साथ मामले की गहराई में जाती हैं, तो एनकाउंटर से पहले की खौफनाक परतें खुलती हैं, जो हमारी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती हैं।


अभिनय और किरदार

करीना कपूर का प्रदर्शन अजूनी के किरदार में प्रभावशाली है। वह एक ऐसी महिला का किरदार निभा रही हैं, जो सिस्टम में विश्वास रखती है, जबकि उनके आस-पास ऐसे सबूत हैं जो इस विश्वास को चुनौती देते हैं। फिल्म में अजूनी के पिता का किरदार भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे पूरी तरह से नहीं दिखाया गया।


फिल्म का संदेश

'दायरा' रागिनी के साथ हुई बर्बरता पर गुस्सा दिलाती है, लेकिन यह समझने में भी मदद करती है कि रमन जैसे व्यक्ति ने ऐसा क्यों किया। फिल्म दोनों पक्षों को सामने रखती है, लेकिन अंत में यह स्पष्ट नहीं करती कि कौन सही है। फिल्म के अंत में दिखाए गए आंकड़े—हर 20 मिनट में रेप की रिपोर्ट, हर दिन एनकाउंटर की खबर—इसकी गंभीरता को दर्शाते हैं।


अंतिम विचार

'दायरा' एक महत्वपूर्ण फिल्म है, जो न्याय और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर सवाल उठाती है। हालांकि, कुछ पहलुओं में कमी रह गई है। फिल्म देखने लायक है, लेकिन यह आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा नहीं उतरती।