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रश्मिका मंदाना की 'रणबाली': 400 परिवारों की मदद और एक प्रेरणादायक कहानी

रश्मिका मंदाना अपनी नई फिल्म 'रणबाली' के साथ न केवल अभिनय कर रही हैं, बल्कि 400 परिवारों की मदद करने का भी संकल्प लिया है। इस फिल्म में उनका किरदार 1876-78 के अकाल से प्रेरित है, जिसने उन्हें जरूरतमंदों की सहायता के लिए प्रेरित किया। रश्मिका ने अपने सामाजिक कार्यों को साझा करने का निर्णय लिया है ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हों। जानें इस फिल्म की कहानी और रश्मिका की मदद की पहल के बारे में।
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रश्मिका मंदाना की नई फिल्म का इंतजार

रश्मिका मंदाना अपनी आगामी फिल्म 'रणबाली' की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। यह फिल्म उनके पति विजय देवरकोंडा के साथ उनकी पहली परियोजना है। रश्मिका इस फिल्म में जयम्मा का किरदार निभा रही हैं, जो 1876-78 के भयंकर अकाल से प्रेरित है। इस भूमिका ने उन्हें 400 परिवारों की सहायता करने के लिए प्रेरित किया।


400 परिवारों को राशन देने की पहल

हाल ही में, रश्मिका ने खुलासा किया कि उन्होंने 400 परिवारों को गोद लिया है और अगले तीन महीनों तक उनके लिए राशन की व्यवस्था करेंगी। उनका उद्देश्य है कि ये परिवार राशन के खर्च को बचाकर अपने भविष्य की बेहतर योजना बना सकें।


सामाजिक कार्यों को साझा करने का निर्णय

रश्मिका ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें राशन के पैकेट बांटे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले वह अपने सामाजिक कार्यों को सार्वजनिक नहीं करती थीं, लेकिन अब उन्होंने इसे साझा करने का निर्णय लिया है ताकि अन्य लोग भी जरूरतमंदों की मदद के लिए प्रेरित हों।


प्रेरणा देने की इच्छा

रश्मिका ने कहा कि वह हमेशा से इस तरह की मदद करती रही हैं और आगे भी करती रहेंगी। उन्होंने बताया कि पहले वह इस बारे में इसलिए नहीं बताती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि यह जानकारी केवल उनकी टीम और करीबी लोगों के लिए ही महत्वपूर्ण है। अब वह चाहती हैं कि उनकी कहानी दूसरों को भी प्रेरित करे।


एक साल तक मदद जारी रखने का संकल्प

रश्मिका ने बताया कि वह हर बार 400 परिवारों की तीन महीने तक मदद करना चाहती हैं और अगले एक साल तक इस कार्य को जारी रखने की योजना बना रही हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी दयालुता किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है।


‘रणबाली’ की पृष्ठभूमि

फिल्म 'रणबाली' 1876-78 के भीषण अकाल पर आधारित है, जो औपनिवेशिक भारत में हुआ था। इस अकाल ने दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े हिस्से को प्रभावित किया। फिल्म में विजय देवरकोंडा एक विद्रोही योद्धा की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि रश्मिका उनकी पत्नी और विद्रोह में उनकी साथी का किरदार निभा रही हैं।