राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, चेक बाउंस मामले में नया मोड़
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
प्रसिद्ध बॉलीवुड कॉमेडियन और अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस के मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने यादव द्वारा 1.15 करोड़ रुपये जमा करने की जानकारी लेते हुए कहा कि उन्हें अब अच्छी फिल्में बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करना चाहिए और अपनी छवि को सुधारना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान यादव के पिछले आदेश का पालन करने की सराहना की, हालांकि उनके पिछले आचरण पर कुछ असंतोष भी व्यक्त किया।
यादव की वित्तीय स्थिति
न्यायालय ने यह भी देखा कि यादव ने 1.15 करोड़ रुपये जमा किए हैं। उनके वकील ने अदालत को बताया कि एक संभावित खरीदार उनकी संपत्ति के लिए तैयार है, जो 12 अक्टूबर तक 85 लाख रुपये जमा करने को इच्छुक है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह यादव के आचरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, लेकिन उन्हें कुछ समय दिया जा रहा है। यादव ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कहा कि उनकी फिल्म 'अता पता लापता' के कारण उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ है।
अभिनेता का बयान
यादव ने कहा, "मैंने लगभग 200 से 250 फिल्मों में काम किया है और पिछले 13 वर्षों में मुझे 200-250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। 'अता पता लापता' से मुझे 17 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।" उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिससे उनकी फिल्म को रिलीज नहीं किया जा सका।
न्यायालय की सलाह
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने सुझाव दिया, "क्या कोई नई फिल्म आ रही है? एक अच्छी फिल्म बनाकर दर्शकों का मनोरंजन करें। आपकी छवि फिर से बन जाएगी।" यह कानूनी विवाद 2010 के एक वित्तीय समझौते से संबंधित है, जिसमें यादव ने अपनी पहली फिल्म 'अता पता लापता' के लिए 5 करोड़ रुपये लिए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यादव ने 2013 में 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे, जो बाउंस हो गए।
समझौता और उच्च न्यायालय का निर्णय
शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में हुए एक समझौते में यादव और उनकी पत्नी ने ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपये लौटाने पर सहमति जताई थी। उच्चतम न्यायालय ने यादव को आत्मसमर्पण से मिली छूट की अवधि को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई को यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की सजा सुनाई थी।
