सामंथा रुथ प्रभु ने साझा की गोद भराई की रस्म की तस्वीरें
सामंथा की गोद भराई की तस्वीरें वायरल
दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग की मशहूर अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने हाल ही में अपनी गोद भराई की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं। इन तस्वीरों ने तेजी से इंटरनेट पर धूम मचा दी है। सामंथा ने पीले रंग का कुर्ता पहना हुआ है और इन तस्वीरों के साथ उन्होंने इस विशेष रस्म के अनुभव को साझा किया है।
भारतीय परंपराओं पर सामंथा का दृष्टिकोण
सामंथा ने कहा कि उन्हें भारतीय परंपराओं का गहरा सम्मान है। उन्होंने यह भी बताया कि भले ही उन्हें हर रस्म का अर्थ स्पष्ट न हो, लेकिन उन्हें हमेशा लगता है कि इन परंपराओं के पीछे एक गहरा अर्थ छिपा होता है। मंत्रों की ध्वनि और उनके जाप से बनने वाला माहौल, साथ ही पीढ़ियों से चली आ रही परंपराएं, हमेशा से उन्हें आकर्षित करती रही हैं।
पुजारी ने समझाया रस्मों का महत्व
सामंथा ने बताया कि जब श्रीविद्या उपासक पुजारी ने उन्हें समारोह की हर रस्म का महत्व समझाया, तो उन्हें यह एहसास हुआ कि यह आयोजन कितनी सोच-समझकर किया गया है। उन्होंने बताया कि हर मंत्र का एक विशेष उद्देश्य है, हर चढ़ावे का अपना महत्व है और हर कदम की अपनी जगह है।
94 कलाओं से जुड़ी रस्म का महत्व
सामंथा ने बताया कि इस समारोह में 'कला आवरण' या 'श्री कल्पम' नाम की एक विशेष रस्म का आयोजन किया गया। यह रस्म श्रीविद्या परंपरा से संबंधित है और देवी की 94 कलाओं को सम्मानित करती है। इस रस्म में होने वाली मां के सात चक्रों से जुड़ी देवी की विभिन्न शक्तियों को सम्मान दिया जाता है।
मां को देवी के रूप में सम्मानित किया गया
सामंथा ने कहा कि इस रस्म की सबसे खास बात यह है कि इसमें होने वाली मां को देवी के रूप में देखा जाता है। उन्हें उस शक्ति के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिसके माध्यम से एक नया जीवन आने वाला है। यह रस्म केवल गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए आशीर्वाद नहीं है, बल्कि उस महिला के लिए भी है, जो मां बनने के साथ अपने जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।
श्री चक्र के केंद्र में सामंथा का स्थान
रस्म के बाद सामंथा को श्री चक्र यंत्र के पवित्र केंद्र में बैठाया गया। उन्होंने बताया कि श्री चक्र में नौ आवरण होते हैं, जो आध्यात्मिक यात्रा के विभिन्न पड़ावों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके केंद्र में एक बिंदु होता है, जो सृष्टि के मूल और ललिता त्रिपुरसुंदरी की उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।
मंत्रों के जाप से सुरक्षा की कामना
समारोह के दौरान देवी खड्गमाला का पाठ किया गया, जिसमें नौ आवरणों से जुड़ी देवी शक्तियों के नाम लिए जाते हैं। सामंथा के अनुसार, इस पाठ का उद्देश्य ध्यान को बाहरी स्तर से आंतरिक स्तर की ओर ले जाना और मां और बच्चे के लिए सुरक्षा और आशीर्वाद की कामना करना है।
सामंथा का आभार
सामंथा ने कहा कि वह इस समारोह में बहुत कम जानकारी के साथ शामिल हुई थीं, लेकिन वहां से लौटते समय उन्होंने खुद को बेहद धन्य और सुरक्षित महसूस किया। उन्होंने शिल्पा रेड्डी का विशेष आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें इस अद्भुत रस्म का अनुभव करने का अवसर दिया।
