सुनील शेट्टी का जन्मदिन: एक्शन से कॉमेडी तक का सफर
सुनील शेट्टी का जन्मदिन विशेष:
सुनील शेट्टी का जन्मदिन विशेष: बॉलीवुड में कुछ सितारे ऐसे होते हैं, जिनका नाम सुनते ही एक खास युग की याद आ जाती है। 90 के दशक का वो समय, जब हीरो के पास लंबी गाड़ी, लंबी जैकेट और हर चुनौती का सामना करने की ताकत होना जरूरी समझा जाता था। इसी समय एक नाम तेजी से उभरा- सुनील शेट्टी।
आज, 11 अगस्त को, बॉलीवुड के इस 'अन्ना' का जन्मदिन है। सुनील शेट्टी 65 वर्ष के हो गए हैं। अपने तीन दशकों के करियर में उन्होंने एक्शन हीरो से लेकर कॉमेडी किंग, विलेन और गंभीर किरदारों तक, हर प्रकार के रोल निभाए हैं।
‘बलवान’ से हुई शुरुआत, लेकिन सफर आसान नहीं था
सुनील शेट्टी ने 1992 में फिल्म 'बलवान' से बॉलीवुड में कदम रखा। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह नया चेहरा आने वाले वर्षों में 90 के दशक के सबसे प्रसिद्ध एक्शन सितारों में से एक बन जाएगा।
'बलवान' के बाद कुछ फिल्मों में उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। लेकिन सुनील ने हार नहीं मानी। फिर आया 1994 का साल और फिल्म 'मोहरा'।
यहीं से कहानी में बदलाव आया
'मोहरा' ने सुनील शेट्टी को वह पहचान दी, जिसका उन्हें इंतजार था। उसी वर्ष 'दिलवाले' और 'गोपी किशन' जैसी फिल्मों ने भी उनके करियर को मजबूती प्रदान की। 'गोपी किशन' में डबल रोल ने साबित कर दिया कि अन्ना सिर्फ मुक्के चलाने के लिए नहीं आए हैं।
90 के दशक में एक्शन का मतलब सुनील शेट्टी
एक समय ऐसा था जब बॉलीवुड की फिल्मों में हीरो की एंट्री धुएं के साथ होती थी, और दर्शकों को भरोसा होता था कि मामला सुनील शेट्टी के हाथ में है।
'वक्त हमारा है', 'अंथ', 'मोहरा', 'टक्कर', 'सपूत', 'भाई' जैसी कई फिल्मों में उन्होंने एक्शन हीरो की छवि को मजबूत किया।
लेकिन सुनील की खासियत केवल एक्शन नहीं थी। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ऐसी थी कि शांत खड़े रहने पर भी लगता था कि सामने वाला ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रह सकता।
‘बॉर्डर’ ने बदल दिया अंदाज
1997 की 'बॉर्डर' सुनील शेट्टी के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म में उन्होंने कैप्टन भैरों सिंह का किरदार निभाया, जिसमें देशभक्ति और भावनाएं थीं। इस फिल्म ने उन्हें एक नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाया।
इसके बाद 'रिफ्यूजी', 'कयामत: सिटी अंडर थ्रेट' और 'LOC: कारगिल' जैसी फिल्मों में भी उनके गंभीर किरदार नजर आए।
फिर आया वो दौर जब ‘अन्ना’ ने लोगों को हंसाना शुरू कर दिया
अगर सुनील शेट्टी की फिल्मोग्राफी में एक फिल्म ऐसी है जिसने उनकी पूरी इमेज को बदल दिया, तो वह है 'हेरा फेरी'। 2000 में आई इस फिल्म में उन्होंने श्याम का किरदार निभाया और अक्षय कुमार के राजू तथा परेश रावल के बाबूराव के साथ एक तिकड़ी बनाई, जिसके डायलॉग आज भी याद किए जाते हैं।
जिस अभिनेता को लोग पहले एक्शन में देखते थे, वही श्याम बनकर अपनी मासूमियत से दर्शकों को हंसाने लगा। दर्शकों ने उन्हें इस नए अंदाज में भी प्यार दिया। इसके बाद 'आवारा पागल दीवाना', 'फिर हेरा फेरी', 'वन टू थ्री' और 'दे दना दन' जैसी कॉमेडी फिल्मों में उनका अलग अंदाज देखने को मिला।
‘धड़कन’ में विलेन बने तो अवॉर्ड भी जीते
सुनील शेट्टी के करियर का एक दिलचस्प मोड़ फिल्म 'धड़कन' भी रही। 2000 में आई इस फिल्म में उन्होंने देव का किरदार निभाया, जो हीरो से ज्यादा किसी और की प्रेम कहानी में विलेन था। सुनील ने इस किरदार को इतनी मजबूती से निभाया कि उनके अभिनय की खूब चर्चा हुई और 2001 में उन्हें 'धड़कन' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला।
एक्शन, कॉमेडी और फिर कैरेक्टर रोल्स
समय के साथ बॉलीवुड में बदलाव आया और सुनील शेट्टी ने भी खुद को बदलने में देर नहीं लगाई। 2000 के दशक में उन्होंने मल्टीस्टारर फिल्मों और विभिन्न किरदारों पर ध्यान केंद्रित किया। 'मैं हूं ना', 'हलचल', 'फिर हेरा फेरी', 'दे दना दन' जैसी फिल्मों में उनका अंदाज दर्शकों को पसंद आया।
बाद के वर्षों में उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और मराठी सिनेमा में भी काम किया। यानी अन्ना ने सिर्फ बॉलीवुड में ही नहीं, बल्कि अन्य फिल्म इंडस्ट्री में भी कदम रखा।
हीरो से आगे बढ़ गया ‘सुनील शेट्टी’ नाम
सुनील शेट्टी की कहानी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है। वह निर्माता भी रहे और मनोरंजन के साथ-साथ व्यापार की दुनिया में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पॉपकॉर्न मोशन पिक्चर्स के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण किया।
लेकिन पर्दे पर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने अपनी एक निश्चित इमेज को हमेशा के लिए अपनी पहचान नहीं बनने दिया। पहले एक्शन हीरो, फिर देशभक्ति वाला किरदार, फिर विलेन, फिर कॉमेडी और फिर कैरेक्टर आर्टिस्ट। हर पड़ाव पर सुनील शेट्टी ने अपने करियर की दिशा थोड़ी बदली और दर्शकों को कुछ नया दिया।
आज भी 'अन्ना' की एंट्री पर नजरें टिक जाती हैं। 90 के दशक के कई हीरो वक्त के साथ पर्दे से दूर हो गए, लेकिन सुनील शेट्टी ने वापसी और नए दौर के सिनेमा के साथ कदम मिलाकर चलना जारी रखा। जब उनकी कोई नई फिल्म या पुरानी फिल्म का कोई सीन सोशल मीडिया पर वायरल होता है, तो एक पूरी पीढ़ी अपने पुराने टीवी स्क्रीन के सामने पहुंच जाती है। वही एक्शन, वही भारी आवाज, वही स्टाइल और वही 'अन्ना' वाला अंदाज।
सुनील शेट्टी ने बॉलीवुड में केवल फिल्में नहीं कीं, बल्कि कई अलग-अलग दौर देखे हैं। उन्होंने वह समय देखा जब सिंगल स्क्रीन थिएटरों में सीटियां बजती थीं, फिर मल्टीप्लेक्स का दौर आया और अब ओटीटी का जमाना है। लेकिन एक चीज नहीं बदली- सुनील शेट्टी को देखकर आज भी लगता है कि अन्ना अभी रिटायर होने के मूड में नहीं हैं।
65वें जन्मदिन पर उन्हें देखकर बस यही कहा जा सकता है- उम्र भले 65 हो गई हो, लेकिन 'अन्ना' वाली अकड़ और स्क्रीन प्रेजेंस अभी भी बिल्कुल फिट है।
