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स्वरा भास्कर ने 'पद्मावत' पर अपने बयान को लेकर दी सफाई

बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने हाल ही में 'पद्मावत' फिल्म पर अपने विवादित बयान को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। स्वरा ने बलात्कार के बाद जीवित बचने वाली महिलाओं की सामाजिक स्थिति पर सवाल उठाया और कहा कि किसी महिला की शारीरिक पवित्रता को उसके जीवन से अधिक महत्वपूर्ण नहीं समझा जाना चाहिए। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और स्वरा का असली संदेश क्या है।
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स्वरा भास्कर का विवादित बयान

मुंबई: बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने पुराने बयान के कारण चर्चा में हैं, जो उन्होंने फिल्म 'पद्मावत' के बारे में दिया था। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान, स्वरा ने फिल्म के अंत और जौहर के दृश्य पर अपनी आपत्ति व्यक्त की थी। इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद, स्वरा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने बयान की स्पष्टता दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और उन्होंने कभी भी रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा।


स्वरा का वीडियो और स्पष्टीकरण

वायरल वीडियो पर स्वरा ने दी सफाई

स्वरा भास्कर ने अपने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि कार्यक्रम में उनसे 2018 में संजय लीला भंसाली को लिखे गए अपने ओपन लेटर के बारे में सवाल किया गया था। इसी सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि उन्हें 'पद्मावत' के क्लाइमैक्स से क्या आपत्ति थी। स्वरा के अनुसार, उनके अंग्रेजी में दिए गए बयान का गलत अनुवाद कर यह दावा किया गया कि उन्होंने रानी पद्मावती और जौहर करने वाली महिलाओं को कायर कहा। उन्होंने इस दावे को गलत बताया और कहा कि ऐसा कुछ नहीं कहा गया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी बयान का सही अर्थ समझने की कोशिश करनी चाहिए, न कि उसका मनगढ़ंत अर्थ बनाकर फैलाना चाहिए।


स्वरा के बयान का संदर्भ

क्या था स्वरा भास्कर के बयान का मतलब?

स्वरा ने अपने बयान का संदर्भ समझाते हुए कहा कि 'पद्मावत' के क्लाइमैक्स को देखते वक्त उनके मन में एक सवाल आया था। उन्होंने इसे बलात्कार के बाद जीवित बचने वाली महिलाओं की सामाजिक स्थिति से जोड़ा। उनका कहना था कि अगर कोई महिला यौन हिंसा का शिकार होने के बाद जीवित बचती है, तो क्या समाज उसे इस तरह देखेगा कि उसकी जान चली जाती तो बेहतर होता? स्वरा ने इसी सोच पर सवाल उठाया। उनका मुद्दा किसी ऐतिहासिक महिला को कायर बताना नहीं था, बल्कि ऐसी सोच पर सवाल उठाना था जिसमें महिला की शारीरिक 'पवित्रता' को उसके जीवन से अधिक महत्वपूर्ण समझा जाए।


यौन हिंसा और समाज की मानसिकता

क्या रेप सर्वाइवर्स को यह संदेश देना चाहिए?

स्वरा ने अपने बयान में समाज में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और उससे जुड़ी मानसिकता का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फिल्मों और कहानियों के जरिए ऐसा संदेश जाना चाहिए कि किसी महिला की जिंदगी से ज्यादा उसकी शारीरिक पवित्रता महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बलात्कार या यौन हिंसा से बचने वाली महिलाओं को यह महसूस नहीं कराया जाना चाहिए कि उनके साथ जो हुआ, उसके बाद उनका जीवित रहना किसी तरह गलत है। स्वरा ने इसी संदर्भ में कहा कि महिला की जिंदगी किसी भी हिंसक घटना के बाद खत्म नहीं हो जाती और उसके जीने के अधिकार को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।