करवा चौथ: विवाहित महिलाओं की चंद्रमा पूजा का महत्व
करवा चौथ का पर्व
नई दिल्ली: हर साल कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 29 अक्टूबर को होगा। विवाहित महिलाएं इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं। इस अवसर पर चंद्रमा की विशेष पूजा की जाती है, जिसके पीछे कई पौराणिक मान्यताएं हैं।
चंद्रमा का महत्व
ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा को मन, शांति, प्रेम और ठंडक का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, करवा चौथ पर विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने के लिए चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। चंद्रमा को पुनर्जन्म और शाश्वत चक्र से भी जोड़ा जाता है, जिससे महिलाएं इसे 'अखंड सौभाग्य' का प्रतीक मानती हैं।
पौराणिक कथाएं
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्र देव अपनी पत्नियों में से रोहिणी को सबसे अधिक प्रिय मानते थे। करवा चौथ के दिन रोहिणी नक्षत्र का विशेष संयोग बनता है, जिससे चंद्रमा का महत्व और बढ़ जाता है। चंद्र देव की पूजा से पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
सूर्य और चंद्र का अंतर
परंपराओं में सूर्य देव को तेजस्वी और उग्र माना जाता है, जबकि चंद्रमा को शांत और ठंडा। चंद्र देव की शीतल किरणें दांपत्य जीवन में कलह को दूर करती हैं और प्रेम बढ़ाती हैं।
महाभारत काल की कथा
महाभारत काल में, योगेश्वर श्रीकृष्ण के समय द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था।
करवा चौथ का अर्थ
करवा का अर्थ होता है मिट्टी का छोटा पात्र और चौथ का मतलब चतुर्थी तिथि। इस दिन महिलाएं करवे में जल भरकर चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करती हैं, इसलिए इसे करवा चौथ कहा जाता है।
