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गणेश चतुर्थी पर विशेष मंत्रों का जप: विघ्नों से मुक्ति का मार्ग

गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश की पूजा और विशेष मंत्रों का जप करने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस लेख में जानें कि कैसे गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है और कौन से मंत्रों का जप करना चाहिए। साथ ही, इन मंत्रों के लाभ भी जानें, जो आपके जीवन को सुख-शांति से भर देंगे।
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गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी जाप: गणेश चतुर्थी के इस पावन पर्व पर भगवान गणेश की पूजा और उनके विशेष मंत्रों का जाप करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाओं, संकटों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' और 'सुखकर्ता' कहा गया है।


गणेश चतुर्थी का त्योहार 2026 में 14 सितंबर को मनाया जाएगा। यह हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान गणेश का अवतरण हुआ था।


मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः


इस मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है।


मंत्र:
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
यह मंत्र कार्यों को बिना किसी बाधा के पूरा करने में सहायता करता है और भय व असमंजस को दूर करता है।


मंत्र:
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात॥


लाभ:
यह मंत्र मन को एकाग्र करता है, सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है और विनम्रता को विकसित करता है।