गुरु पूर्णिमा: गुरु की पूजा और महत्व
गुरु पूर्णिमा, जो 29 जुलाई को मनाई जाएगी, महर्षि वेदव्यास की जयंती है। इस दिन गुरु की पूजा का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन लोग अपने गुरु का सम्मान करते हैं और उनके उपदेशों का पालन करने का संकल्प लेते हैं। जानें इस दिन की पूजा विधि और शुभ कार्यों के बारे में।
| Jul 28, 2026, 18:23 IST
गुरु पूर्णिमा का महत्व
आषाढ़ मास की पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पूजा का विशेष पर्व गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। यह दिन न केवल आम लोगों के लिए, बल्कि भगवान के लिए भी ज्ञान प्राप्ति का अवसर है। गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है, जिन्होंने वेदों का संपादन किया और महाभारत तथा अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होकर 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक रहेगी। इस दिन हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु माना था, और भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरुओं का सम्मान किया। इसलिए, गुरु का स्थान अत्यंत ऊँचा है। गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु की पूजा करें, उपहार दें और उनकी शिक्षाओं का पालन करने का संकल्प लें। इससे जीवन में सुख और सफलता प्राप्त हो सकती है।
गुरु का महत्व
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि भारत में गुरु पूर्णिमा को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में गुरु के महत्व को स्पष्ट किया गया है। गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि वे ही हमें भगवान तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं। यह पर्व गुरु की पूजा और सम्मान के लिए समर्पित है, जो ज्ञान और आत्मज्ञान के मार्ग पर मार्गदर्शन करते हैं।
पूर्णिमा तिथि
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई को शाम 6:18 बजे से शुरू होकर 29 जुलाई को रात 8:05 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर सूर्य को जल चढ़ाएं और घर के मंदिर में पूजा करें। इसके बाद अपने गुरु के घर जाकर उन्हें ऊंचे आसन पर बैठाएं और हार-फूल, कुमकुम, चावल से पूजा करें। गुरु को मिठाई, फल और फूल चढ़ाएं और उपहार दें। इस दिन वेदव्यास की भी पूजा करें और उनके ग्रंथों का पाठ करें। गुरु के उपदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें।
शुभ कार्य
डा. अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा पर अनाज, धन, कपड़े, जूते-चप्पल, छाता, कंबल, चावल, खाना और ग्रंथों का दान करना शुभ माना जाता है। किसी गौशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं और किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें। शिवलिंग पर जल, दूध चढ़ाएं और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए चंदन का लेप करें। हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें। भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग तुलसी के साथ लगाएं।
