गुरु प्रदोष व्रत 2026: जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
नई दिल्ली: प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती के प्रति समर्पित माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत किया जाता है, जो शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आता है। इस बार त्रयोदशी गुरुवार को है, इसलिए 8 अक्टूबर को गुरु प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शिव की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शिवलिंग पर चढ़ाने योग्य 5 चीजें
1. बेलपत्र- भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है। गुरु प्रदोष के दिन शिवलिंग पर साफ बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। इससे महादेव की कृपा प्राप्त होती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
2. पीला चंदन- गुरु प्रदोष पर शिवलिंग पर पीला चंदन अर्पित करना लाभकारी होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चंदन चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन में सकारात्मकता आती है।
3. शहद- शिवलिंग पर शहद अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। इससे सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है। शहद चढ़ाने के बाद शिवलिंग को स्वच्छ जल से स्नान कराना चाहिए।
4. कच्चा दूध- गुरु प्रदोष के दिन कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा है। यह घर-परिवार में सुख और समृद्धि लाने के लिए शुभ माना जाता है।
5. पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से बने पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके बाद जल से अभिषेक कर शिवजी को बेलपत्र और फूल अर्पित करें।
गुरु प्रदोष 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11:16 बजे से शुरू होगी और 8 अक्टूबर की रात 10:15 बजे समाप्त होगी। गुरु प्रदोष की पूजा के लिए शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक का समय शुभ माना गया है।
गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष को गुरु प्रदोष या बृहस्पति प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बृहस्पति ज्ञान, शिक्षा, धन, धर्म और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन भगवान शिव की आराधना विद्यार्थियों और आध्यात्मिक साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसके अलावा, विवाह, संतान और पारिवारिक सुख से जुड़ी मनोकामनाओं के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है।
