जितिया व्रत: बच्चों के लिए शुभ कार्य और पूजा विधि
जितिया व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में जितिया या जीवित्पुत्रिका का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन माताएं अपने बच्चों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए व्रत करती हैं। इस अवसर पर राजा जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व है।
इस वर्ष जितिया व्रत की तिथि
यह पर्व इस बार 03 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस व्रत की परंपरा बहुत पुरानी है, जिसमें माताएं निर्जला व्रत रखकर पूजा करती हैं और अपने बच्चों की भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं। यह पर्व तीन दिनों तक चलता है। पहले दिन नहाय-खाय की रस्म होती है, जिसमें माताएं पवित्र नदी में स्नान करती हैं या गंगाजल डालकर स्नान करती हैं और फिर शुद्ध शाकाहारी भोजन करती हैं।
व्रत की प्रक्रिया
दूसरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है, और तीसरे दिन सूर्योदय के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन बच्चों को कुछ शुभ कार्य करने चाहिए, जिससे उन पर भगवान की कृपा बनी रहती है।
बच्चों के लिए शुभ कार्य
सूर्य देव को अर्घ्य दें
जितिया व्रत के दिन बच्चों को सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इससे उनकी बुद्धि और स्वास्थ्य में सुधार होता है। इस दिन बच्चों को 'ॐ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप 11 बार करना चाहिए।
गंगाजल से स्नान करें
इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो स्नान के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान करना चाहिए। इससे रोग दूर होते हैं और बच्चों को शक्ति और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
बड़ों का आशीर्वाद लें
इस व्रत में राजा जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व है। माताएं और बच्चे यदि मिलकर उनकी पूजा करते हैं, तो बच्चों को दीर्घायु का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन बच्चों को घर के सभी बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए, जिससे उन्हें अच्छी सेहत और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
