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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: जानें इस दिन के महत्व और शुभ कार्यों के लिए सही समय

ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। भद्रा का प्रभाव इस बार विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। जानें इस दिन स्नान, दान और पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त और चंद्रमा के उदय का समय। इस पर्व से जुड़े सभी धार्मिक कार्यों की जानकारी प्राप्त करें और अपने जीवन में सुख-समृद्धि लाने के उपाय जानें।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व


नई दिल्ली: आज 29 जून 2026, सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन दिन पर स्नान, दान, व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए शुभ कार्यों के लिए समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।


भद्रा का प्रभाव

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार वट पूर्णिमा यानी स्नान पूर्णिमा के दिन भद्रा सुबह 5:50 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:46 बजे तक रहेगी। ज्योतिष शास्त्र में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों से बचना चाहिए। इसलिए श्रद्धालुओं को पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य करते समय भद्रा के समय का ध्यान रखना चाहिए।


चंद्रमा का उदय

चंद्रमा कब दिखाई देगा?


पूर्णिमा तिथि पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा रात 10:21 बजे उदित होगा। धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने और उनकी पूजा करने से मन को शांति मिलती है तथा कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


स्नान और दान का महत्व

स्नान और दान का धार्मिक महत्व


ज्येष्ठ पूर्णिमा को स्नान पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदी, सरोवर या किसी धार्मिक जल स्रोत में स्नान करना बेहद पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। स्नान के बाद जरूरतमंद लोगों को दान देने की भी परंपरा है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन किया गया दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलता है।


व्रत का फल

व्रत रखने से क्या मिलता है फल?


ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने वाले भक्तों के जीवन में धन, वैभव, सुख और शांति का आगमन होता है। साथ ही परिवार में खुशहाली और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।


दान की शुभ वस्तुएं

इस दिन किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है?


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मौसमी फल, अन्न, वस्त्र, गुड़, जल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए प्यासे लोगों को पानी पिलाना या जल से जुड़ी वस्तुओं का दान करना भी पुण्यदायी माना गया है। इससे व्यक्ति को शुभ फल मिलने की मान्यता है।


शुभ मुहूर्त

स्नान-दान के शुभ मुहूर्त


यदि आप ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान, दान या पूजा करने की योजना बना रहे हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है।


अभिजित मुहूर्त:  दोपहर 1:22 बजे से 2:26 बजे तक
विजय मुहूर्त: शाम 4:35 बजे से 5:40 बजे तक
अमृत काल: शाम 5:23 बजे से 7:10 बजे तक


धार्मिक मान्यता के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में पूजा, दान और अन्य धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं भद्रा समाप्त होने के बाद पूजा-पाठ और मांगलिक कार्य करना अधिक शुभ माना जाता है। इसलिए श्रद्धालुओं को पूरे दिन के समय का ध्यान रखते हुए अपने धार्मिक कार्यों की योजना बनानी चाहिए.