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ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत: महत्व, पूजा विधि और लाभ

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व है, जिसमें भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। इस दिन श्रद्धा से किया गया व्रत सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करता है। जानें इस व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय। साथ ही, जानें किन चीजों से बचना चाहिए और क्या दान करना चाहिए। इस व्रत से जुड़ी रोचक पौराणिक कथा भी जानें।
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ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का महत्व

आज ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत है, जो सनातन धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धा और नियम से किया गया व्रत सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और पुण्य फल प्रदान करता है। आइए, जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का महत्व और पूजा विधि के बारे में। 


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन तुलसी माता की पूजा भी विशेष फल देती है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि व्रत के दिन दूसरे के घर का भोजन (परान्न) नहीं खाना चाहिए। घर में सात्विक और शुद्ध भोजन या फलाहार ग्रहण करना शुभ होता है।


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 29 जून 2026, सुबह 3:06 बजे


पूर्णिमा तिथि समाप्त: 30 जून 2026, सुबह 5:26 बजे


चंद्रोदय: 29 जून 2026, शाम 7:16 बजे


मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से आर्थिक समृद्धि और सुख-शांति प्राप्त होती है। शाम को मां लक्ष्मी को मखाने की खीर का भोग लगाएं और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। मां लक्ष्मी के सामने 11 कौड़ियां अर्पित करें और अगले दिन लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। पीपल के पेड़ पर कच्चा दूध और बताशा अर्पित करें। पूर्णिमा की रात चंद्रदेव को दूध और गंगाजल से अर्घ्य दें।


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत में किन चीजों से बचें

व्रत के दिन मांसाहार और शराब का सेवन वर्जित है। इसके अलावा शहद, बैंगन, मूली और शलजम जैसी चीजों से भी परहेज करना चाहिए। इनका सेवन व्रत की शुद्धता को प्रभावित कर सकता है।


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत की पौराणिक कथा

एक समय भगवान श्रीकृष्ण ने माता यशोदा को पूर्णिमा व्रत का महत्व बताया। एक धनी ब्राह्मण धनपाल और उसकी पत्नी संतानहीन थे। संत के कहने पर उन्होंने पूर्णिमा का व्रत रखा और उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ। इस व्रत के प्रभाव से उनके जीवन में सुख और समृद्धि आई।


व्रत का उद्देश्य

व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं है, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार की शुद्धता का संकल्प है। इस दिन क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। शांत मन से पूजा-पाठ और दान करने से व्रत का महत्व बढ़ता है।


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत में क्या खाएं

इस दिन फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है। कुछ लोग सेंधा नमक के साथ फलाहारी भोजन करते हैं।


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर दान

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दान का विशेष महत्व है। जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, सत्तू, गुड़, फल और अनाज का दान करें।


ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत पर क्या न करें

इस दिन किसी से विवाद या झगड़ा करने से बचें। झूठ बोलने या किसी का अपमान करने से भी दूर रहें। तामसिक भोजन और नशे से पूरी तरह दूरी बनाएं।