दिवाली 2026: जानें इस महापर्व के पीछे की तीन पौराणिक कथाएं
दिवाली का त्योहार
8 नवंबर 2026 को पूरे देश में दीपावली का पर्व मनाया जाएगा, जिसे रौशनी का त्योहार भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों को दीपों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। शाम को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दिवाली का पर्व अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
दिवाली मनाने की शुरुआत
क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली मनाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें भगवान राम की अयोध्या वापसी, पांडवों का वनवास से लौटना, और समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्रकट होना शामिल हैं। आइए, इन तीन मान्यताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।
1. भगवान राम का अयोध्या लौटना
दिवाली मनाने की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक मान्यता भगवान श्रीराम से जुड़ी है। रामायण के अनुसार, भगवान राम ने पिता के वचन का पालन करते हुए 14 वर्षों का वनवास बिताया। इस दौरान रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया। माता सीता को मुक्त कराने के लिए भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई की और रावण का वध किया। वनवास की अवधि समाप्त होने पर, भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण अयोध्या लौटे। उनके स्वागत में अयोध्या के निवासियों ने नगर को दीपों से रोशन कर दिया। इसी परंपरा को याद करते हुए हर साल कार्तिक अमावस्या को दिवाली मनाई जाती है। यह कथा अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश देती है।
2. पांडवों की वापसी
दिवाली से जुड़ी एक अन्य मान्यता महाभारत काल के पांडवों से संबंधित है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों को जुए में हारने के बाद 12 वर्षों का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना पड़ा। जब पांडव 13 वर्षों की कठिनाई के बाद लौटे, तो उनके स्वागत में दीप जलाए गए। इस कारण कुछ मान्यताओं में दिवाली का संबंध पांडवों की घर वापसी से भी जोड़ा जाता है।
3. समुद्र मंथन और मां लक्ष्मी
दिवाली की तीसरी प्रमुख मान्यता समुद्र मंथन और मां लक्ष्मी के प्रकट होने से जुड़ी है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, जिससे कई अनमोल रत्न और दिव्य वस्तुएं निकलीं। इनमें मां लक्ष्मी भी प्रकट हुईं, जिन्हें धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। इसलिए, कार्तिक अमावस्या की रात दिवाली पर उनकी विशेष पूजा की जाती है। भक्त अपने घरों की सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं और मां लक्ष्मी से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
