दिवाली पर कनकधारा स्तोत्र का पाठ: मां लक्ष्मी की कृपा पाने का अद्भुत तरीका
दिवाली का महत्व और मां लक्ष्मी की पूजा
नई दिल्ली: दिवाली का पर्व केवल दीयों और पटाखों का नहीं है, बल्कि यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। मान्यता है कि कार्तिक मास की अमावस्या की रात मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं। इसलिए, इस रात जागकर उनकी पूजा करने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि यदि आप चाहते हैं कि मां लक्ष्मी आपके घर में सदैव रहें, तो दिवाली की रात 12 बजे के बाद सोना नहीं चाहिए। इस समय हवन, श्रीसूक्तम और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। विशेष रूप से, आधी रात में सिंह लग्न में कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
कनकधारा स्तोत्र का महत्व और आदि शंकराचार्य की कथा
कनकधारा स्तोत्र को धन और समृद्धि का स्तोत्र माना जाता है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसे पढ़ने के लिए किसी विशेष पूजा सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, बस सच्चे मन से पाठ करना आवश्यक है। यह स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है। एक बार, एक गरीब ब्राह्मण महिला ने उन्हें एक आंवला दान में दिया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शंकराचार्य ने मां लक्ष्मी की स्तुति की, जिससे उस महिला के घर में सोने के आंवलों की वर्षा हुई। तभी से इसे कनकधारा, यानी सोने की धारा बरसाने वाला स्तोत्र कहा जाता है।
कनकधारा स्तोत्र में मां लक्ष्मी के सुंदर रूप की प्रशंसा की गई है। इसमें कहा गया है कि मां की एक कृपा भरी नजर ही इंसान के सारे दुख, गरीबी और बुरे कर्मों को समाप्त कर सकती है। जो भक्त नियमित रूप से इस स्तोत्र से मां की स्तुति करता है, वह गुणवान और भाग्यशाली बनता है। दिवाली की रात, पूजा के बाद शांत मन से इस स्तोत्र का पाठ करें। यदि पूरा पाठ नहीं कर पाते हैं, तो इसके कुछ श्लोक भी पढ़ सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा और विश्वास। कहा जाता है कि इस रात किया गया पाठ पूरे वर्ष घर में सुख, शांति और धन बनाए रखता है।
