धनतेरस 2023: जानें कब है खरीदारी का शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व
धनतेरस का पर्व और खरीदारी की तैयारी
नई दिल्ली: दिवाली के आगमन के साथ ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। सोने-चांदी की दुकानों से लेकर बर्तन बाजार तक भीड़ नजर आ रही है। धनतेरस, जो इस पांच दिवसीय उत्सव का पहला दिन है, पर खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। हालांकि, इस बार तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है। कुछ लोग इसे 6 नवंबर बता रहे हैं, जबकि अन्य 7 नवंबर का उल्लेख कर रहे हैं। आइए, पंचांग के अनुसार सही तारीख का पता लगाते हैं।
धनतेरस की सही तारीख
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 9:30 बजे से शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 11:45 बजे तक रहेगी। चूंकि धनतेरस का पर्व प्रदोष काल में मनाया जाता है, इसे 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक रहेगा। इस समय भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा करना फलदायी माना जाता है।
खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर खरीदारी के लिए तीन विशेष मुहूर्त हैं:
पहला मुहूर्त सुबह का है, जो 8:16 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा। इस समय सोना, चांदी या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। दूसरा मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त है, जो 11:48 बजे से 12:56 बजे तक रहेगा। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण मुहूर्त शाम का है, जो 6:02 बजे से 7:58 बजे तक वृषभ काल में रहेगा। इस समय की गई खरीदारी से साल भर समृद्धि की प्राप्ति होती है।
धनतेरस का महत्व
धनतेरस का पर्व समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि के अमृत कलश के साथ प्रकट होने की मान्यता से जुड़ा है। उन्हें देवताओं का चिकित्सक माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा आरोग्य के लिए की जाती है। इसके साथ ही धन के देवता कुबेर की पूजा से घर में सुख और समृद्धि आती है।
पूजा विधि
शाम को उत्तर दिशा में कुबेर और धन्वंतरि जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। एकमुखी घी का दीपक जलाएं। कुबेर जी को सफेद मिठाई और धन्वंतरि जी को पीली मिठाई का भोग अर्पित करें। फिर 'ॐ ह्रीं कुबेराय नमः' मंत्र का जाप करें और धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करें। पूजा के बाद प्रसाद बांटें और दिवाली पर कुबेर जी को तिजोरी में स्थापित करें।
