परम एकादशी 2026: तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त
परम एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है, खासकर अधिक मास में। यह व्रत हर तीन साल में एक बार आता है और इसे विधिपूर्वक करने से आर्थिक समस्याएं दूर होने का विश्वास है। जानें 2026 में परम एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।
| Jun 10, 2026, 11:52 IST
परम एकादशी का महत्व
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है, विशेषकर अधिक मास में आने वाली एकादशी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो हर तीन साल में एक बार आता है। इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष में परम एकादशी का व्रत रखा जाता है। गृहस्थ और वैष्णव के लिए एकादशी व्रत की तिथियों में भिन्नता होती है, जिससे लोगों में भ्रम उत्पन्न होता है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि वैष्णव और गृहस्थ कब परम एकादशी का व्रत रखेंगे और इसके शुभ मुहूर्त क्या हैं।
परम एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
परम एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून को रात 12:57 बजे प्रारंभ होगी और इसका समापन 11 जून को रात 10:36 बजे होगा। इस बार 11 जून को सूर्योदय के समय शुद्ध एकादशी तिथि है। दोनों वर्ग के लोग 11 जून को परम एकादशी का व्रत करेंगे। व्रत का पारण 12 जून को सुबह 05:23 बजे से 08:10 बजे तक किया जाएगा।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:42 बजे से 04:42 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:53 बजे से 12:49 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:40 बजे से 02:36 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:18 बजे से 07:38 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 12:01 बजे से 12:41 बजे तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन
परम एकादशी का धार्मिक महत्व
परम एकादशी का महत्व
यह एकादशी हर वर्ष नहीं आती है और यह व्रत पुरुषोत्तम मास के कृष्ण पक्ष में आता है। यह शुभ संयोग केवल तीन साल में एक बार बनता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
इस व्रत का उद्देश्य सर्वोच्च सुख, समृद्धि और सिद्धियों की प्राप्ति है। धार्मिक विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति की गरीबी और धन संबंधी परेशानियां समाप्त होती हैं। साथ ही, यह अनजाने में किए गए पापों का नाश कर पुण्यफल और श्रेष्ठ लोक की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
