Newzfatafatlogo

परिवर्तिनी एकादशी: महत्व, पूजा विधि और व्रत के नियम

परिवर्तिनी एकादशी, जिसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है, भगवान विष्णु की आराधना का विशेष दिन है। इस दिन भक्त विशेष पूजा विधि के माध्यम से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि परिवर्तिनी एकादशी का महत्व क्या है, इसके शुभ मुहूर्त, व्रत के नियम और भगवान विष्णु को अर्पित किए जाने वाले भोग के बारे में। साथ ही, इस दिन से जुड़ी पौराणिक कथा भी प्रस्तुत की गई है, जो इस पर्व के महत्व को और बढ़ाती है।
 | 

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

आज परिवर्तिनी एकादशी का पर्व है, जिसे भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इस दिन भगवान विष्णु का क्षीरसागर में करवट बदलना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस एकादशी पर कुछ विशेष उपाय करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आइए, हम आपको इस व्रत का महत्व और पूजा विधि के बारे में जानकारी देते हैं।


परिवर्तिनी एकादशी के बारे में जानें

धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर्ष में 24 एकादशी आती हैं, जिनमें से प्रत्येक महीने में एक एकादशी होती है। इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से जीवन में सुख और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। भाद्रपद मास की परिवर्तिनी एकादशी को जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष, 22 सितंबर को परिवर्तिनी एकादशी का व्रत किया जाएगा।


परिवर्तिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात 8 बजे से शुरू होगी और 22 सितंबर की रात लगभग 9:43 बजे समाप्त होगी।


व्रत के नियम

पंडितों के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का पारण सूर्योदय के बाद करना चाहिए। इस दिन तुलसी का प्रयोग अनिवार्य है। एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनें और क्रोध से दूर रहें। तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। तामसिक भोजन का सेवन न करें और बाल, दाढ़ी और नाखून काटने से बचें।


पारण का समय

- एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर 2026, 08:00 PM
- एकादशी तिथि समाप्त: 22 सितंबर 2026, 09:43 PM
- पारण तिथि: 23 सितंबर 2026
- पारण का समय: 06:27 AM से 08:53 AM
- द्वादशी समाप्त होने का समय: 10:50 PM


भगवान विष्णु को भोग

भगवान विष्णु को पंचामृत का भोग अर्पित करना चाहिए, जिसमें दूध, दही, चीनी, शहद और घी शामिल होते हैं। इसके अलावा, पंचमेवा जैसे बादाम, काजू, किशमिश आदि भी अर्पित करें। एकादशी के दिन पीले रंग के लड्डू और खीर भी चढ़ाएं।


परिवर्तिनी एकादशी की पौराणिक कथा

राजा मांधाता की कथा के अनुसार, जब उनके राज्य में सूखा पड़ा, तो ऋषियों ने उन्हें परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया, जिससे राज्य में बारिश हुई और प्रजा सुखी हो गई।


सावधानियाँ

एकादशी व्रत के नियमों के अनुसार, तिथि की शुरुआत के बाद मसूर दाल और रात्रि भोजन से बचना चाहिए। 21 सितंबर को हल्का और सात्त्विक भोजन करना बेहतर है।


स्वास्थ्यवर्धक आहार

एकादशी व्रत में साबूदाना, सिंघाड़ा, आलू और मूंगफली का सेवन किया जा सकता है। व्रत के दौरान संयम रखना और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।


परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान-पुण्य से भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है। भक्त भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी और फल अर्पित करते हैं। यह दिन भक्ति और संयम का अवसर है।