भडल्या नवमी: शुभ कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त का महत्व
भडल्या नवमी, जिसे अबूझ मुहर्त कहा जाता है, सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय सलाह के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। 22 जुलाई 2026 को मनाई जाने वाली इस तिथि पर विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों का आयोजन किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, यह दिन अक्षय तृतीया के समान फलदायी है। जानें इस दिन के महत्व और पूजा विधियों के बारे में।
| Jul 21, 2026, 17:41 IST
भडल्या नवमी का महत्व
सनातन धर्म में भडल्या नवमी का विशेष स्थान है, जिसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। सरल शब्दों में, इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय सलाह के सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से शुरू होगी और इसका समापन अगले दिन, 23 जुलाई 2026 को सुबह 7:03 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, भडल्या नवमी 22 जुलाई को मनाई जाएगी। यह दिन अक्षय तृतीया के समान शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस तिथि पर सभी प्रकार के शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
विवाह मुहूर्त और भडल्या नवमी
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि भडल्या नवमी 22 जुलाई को है, जो इस सीजन का अंतिम विवाह मुहूर्त है। हालांकि, इस समय गुरु अस्त में हैं, जिससे मांगलिक कार्यों पर रोक लगी हुई है। फिर भी, भडल्या नवमी को अबूझ मुहर्त माना जाने के कारण इस दिन विवाह की संख्या अधिक होगी। इसके दो दिन बाद, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चार महीने के लिए सभी मांगलिक कार्य थम जाएंगे, जो एक नवंबर को देवों के जागने के साथ फिर से शुरू होंगे।
अबूझ मुहर्त का महत्व
ज्योतिष विद्वानों और शास्त्रों के अनुसार, अबूझ मुहर्त में किसी प्रकार के पंचांग या मुहर्त की आवश्यकता नहीं होती है। इसमें गुरु या शुक्र तारा अस्त होने की स्थिति को भी नहीं देखा जाता है।
भडल्या नवमी की पूजा
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि 22 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल नवमी है, जिसे भडल्या नवमी कहा जाता है। इस दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी समाप्त हो रही है। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी है, जब भगवान विष्णु चार महीनों के लिए विश्राम करते हैं, इसलिए शुभ कार्यों के लिए मुहर्त नहीं होते। भडल्या नवमी को अबूझ मुहर्त माना जाता है, जिससे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश या नए कार्य की शुरुआत जैसे शुभ कार्य बिना मुहर्त देखे किए जा सकते हैं। इस दिन गणेश जी, शिव जी और देवी दुर्गा की विशेष पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंदों को धन, अनाज, छाता, जूते-चप्पल, और कपड़े का दान करना चाहिए।
भडल्या नवमी तिथि
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार, पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जुलाई 2026 को सुबह 5:16 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 23 जुलाई 2026 को सुबह 7:03 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार, इसे 22 जुलाई को मनाया जाएगा।
गुरु का अस्त होना
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इसके बाद भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं, जिससे अगले चार महीने तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में चातुर्मास शुरू होने से पहले शुभ कार्य करने का अंतिम दिन भडल्या नवमी है। 15 जुलाई को गुरु कर्क राशि में अस्त हो गए हैं और 10 अगस्त को गुरु उदय होंगे।
खरमास का समय
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष नवंबर में केवल सात दिन और दिसंबर में सिर्फ पांच दिन विवाह मुहर्त हैं। 15 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक खरमास होने के कारण विवाह नहीं हो सकेंगे। विवाह मुहर्त 15 दिसंबर से चार फरवरी तक नहीं होंगे। शुक्र ग्रह के उदित होने के बाद पांच फरवरी से विवाह मुहर्त की शुरुआत होगी।
अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहर्त
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि भडल्या नवमी को अबूझ या स्वयंसिद्ध मुहर्त के रूप में माना गया है। इसका अर्थ है कि इस दिन शुभ कार्यों के लिए मुहर्त की आवश्यकता नहीं होती।
महत्व
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि भडल्या नवमी तिथि स्वयंसिद्ध मुहर्त है। इस दिन शुभ कार्य करने के लिए ज्योतिष गणना की आवश्यकता नहीं होती है। किसी भी समय जातक अपनी सुविधा के अनुसार शुभ कार्य कर सकते हैं। इस तिथि पर शुभ कार्य करने से अक्षय तृतीया के समान फल प्राप्त होता है।
विशेषज्ञ की राय
- डा. अनीष व्यास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक
