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रक्षाबंधन 2026: चंद्र ग्रहण का प्रभाव और शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन 2026 इस बार एक विशेष खगोलीय संयोग के साथ मनाया जाएगा, जिसमें चंद्र ग्रहण भी शामिल है। जानें कि क्या इसका असर राखी बांधने के शुभ मुहूर्त पर पड़ेगा। भारत में ग्रहण का दृश्य प्रभाव नहीं होगा, जिससे पर्व के पारंपरिक आयोजन सामान्य रूप से संपन्न होंगे। इस लेख में हम चंद्र ग्रहण के समय, अवधि और रक्षाबंधन पर इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।
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रक्षाबंधन का विशेष संयोग

नई दिल्ली। इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व एक अनोखे खगोलीय संयोग के साथ मनाया जाएगा। 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को भाई-बहन के रिश्ते का यह त्योहार मनाया जाएगा, और इसी दिन साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भी होगा। इस पर कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे क्या राखी समय पर बंधेगी?


ग्रहण का समय और अवधि

चंद्र ग्रहण की जानकारी के बाद लोगों में यह जिज्ञासा है कि क्या ग्रहण के कारण राखी बांधने का शुभ मुहूर्त प्रभावित होगा। पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस सवाल का उत्तर सकारात्मक है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण सुबह 6:55 बजे शुरू होगा और दोपहर 12:30 बजे समाप्त होगा। इसकी कुल अवधि लगभग 5 घंटे 35 मिनट होगी। यह वर्ष 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण माना जा रहा है।


भारत में ग्रहण का दृश्य प्रभाव नहीं

भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

इस ग्रहण की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका दृश्य प्रभाव भारत में नहीं होगा। ग्रहण के समय देश में दिन रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। इसलिए, भारत के किसी भी हिस्से से इस खगोलीय घटना को नहीं देखा जा सकेगा।


रक्षाबंधन पर शुभ मुहूर्त

राखी के शुभ मुहूर्त पर नहीं पड़ेगा असर

रक्षाबंधन पर बहनें निश्चित शुभ समय में भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए शुभ मुहूर्त में कोई बदलाव नहीं होगा। पर्व पहले की तरह मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 6:10 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा, जो लगभग 3 घंटे 37 मिनट का होगा।


सूतक काल का प्रभाव

सूतक काल भी नहीं होगा मान्य

धर्मशास्त्रों के अनुसार, सूतक काल तभी प्रभावी होता है जब ग्रहण संबंधित स्थान पर दिखाई दे। चूंकि 28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए यहां सूतक काल लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने की आवश्यकता नहीं होगी। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान सामान्य दिनों की तरह किए जा सकेंगे।


रक्षाबंधन का उत्सव सामान्य रूप से मनाया जाएगा

इस बार रक्षाबंधन पर ग्रहण का संयोग बन रहा है, लेकिन भारत में इसके अदृश्य रहने के कारण त्योहार के पारंपरिक आयोजन, राखी बांधने का शुभ समय और पूजा-पाठ की सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संपन्न होंगी।