शरद पूर्णिमा 2026: पूजा विधि और महत्व
शरद पूर्णिमा का महत्व
सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा को एक विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, साथ ही भगवान विष्णु की आराधना से धन की कमी दूर होती है। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन आकाश से अमृत की बूंदें गिरती हैं। चंद्रमा इस दिन पृथ्वी के निकटतम होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। चांदनी में खीर रखने की परंपरा का वैज्ञानिक आधार यह है कि चंद्रमा की किरणें खीर को अमृत के समान बना देती हैं।
पूजा का समय और विधि
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि इस साल पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। इस दौरान चंद्रमा की पूजा 25 अक्टूबर की रात को की जाएगी। खीर को चांदनी में रखने की परंपरा भी है। 26 अक्टूबर को सुबह स्नान और दान-पुण्य का कार्य किया जाएगा।
कोजागरी पूर्णिमा का नाम
शरद पूर्णिमा को कई स्थानों पर कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में मनाया जाता है। इस दिन लक्ष्मी जी और भगवान विष्णु की पूजा से आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति होती है।
भगवान कृष्ण की महारास लीला
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण ने शरद पूर्णिमा पर महारास की रचना की थी। इस दिन चंद्र देवता की पूजा की जाती है और खीर का भोग अर्पित किया जाता है।
शुभ संयोग
इस दिन रवि योग सुबह 6:28 बजे से शुरू होगा और शाम 7:22 बजे तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग भी इसी दिन शाम को बनेगा।
पूजा विधि
इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। यदि संभव न हो, तो घर पर गंगाजल डालकर स्नान करें। फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें और विधिपूर्वक पूजा करें।
