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सर्वपितृ अमावस्या: पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने का खास दिन

सर्वपितृ अमावस्या, हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का अंतिम दिन है, जब लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान करने से पितरों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। 10 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस पर्व के दौरान विशेष कार्यों और नियमों का पालन करना आवश्यक है। जानें इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं, ताकि आप अपने पूर्वजों को सही तरीके से श्रद्धांजलि दे सकें।
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सर्वपितृ अमावस्या का महत्व


नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का अंतिम दिन माना जाता है। यह दिन अपने पूर्वजों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्राद्ध, तर्पण और दान करने से पितरों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, वे भी इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं। यदि पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध नहीं किया गया हो, तो सर्वपितृ अमावस्या पर इसे पूरा किया जा सकता है।


सर्वपितृ अमावस्या की तिथि

सर्वपितृ अमावस्या कब है?


हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर की रात 9:35 बजे से शुरू होकर 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, 10 अक्टूबर को यह पर्व मनाया जाएगा। श्राद्ध के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। सही मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहेगा।


सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करें?

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या करना चाहिए?


इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और पूर्वजों को याद करते हुए पूजा करें। भोजन बनाते समय श्राद्ध के भोजन में से पहले देवता, गाय, कुत्ते, चीटियों और कौए के लिए भोजन निकालें। जरूरतमंदों को भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्यानुसार अनाज, वस्त्र या धन का दान करें। कई स्थानों पर शाम को पितरों की याद में दीपक जलाने की परंपरा भी है, जिसमें दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है।


सर्वपितृ अमावस्या पर क्या न करें?

सर्वपितृ अमावस्या पर क्या न करें?


इस दिन मांस और मछली का सेवन न करें, शराब से दूर रहें। कई परिवार प्याज और लहसुन का सेवन करते हैं, इससे भी बचना चाहिए। सात्विक भोजन बनाना चाहिए और ब्राह्मणों को भोग लगाना चाहिए। परिवार में झगड़े से बचें और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें। किसी का अपमान न करें और प्रेम से पेश आएं। गरीबों की मदद करें और पशु-पक्षियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करें। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य न करें। नए सामान की खरीदारी से भी बचें।


श्राद्ध करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

श्राद्ध करते समय इन जरूरी नियमों का रखें ध्यान


श्राद्ध कर्म के लिए दोपहर का समय विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कुतुप काल और अपराह्न काल में पितरों का श्राद्ध करना शुभ रहता है। सही मुहूर्त के लिए उस दिन का पंचांग अवश्य देखें। श्राद्ध अपनी भूमि या किसी पवित्र स्थान पर करना अच्छा माना जाता है। इस दौरान श्रद्धा के साथ पितरों का स्मरण करें। श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को संयमित जीवन बिताने और ब्रह्मचर्य का पालन करने की सलाह दी जाती है।