हरियाली तीज पर सिंधारा: क्या दें और क्या न दें
हरियाली तीज का महत्व
अखंड सौभाग्य के लिए व्रत करती हैं सुहागिन महिलाएं
हरियाली तीज का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष, हरियाली तीज 15 अगस्त, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन, सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए व्रत करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को करती हैं।
सिंधारा का महत्व
हरियाली तीज का त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं विधिपूर्वक शिवजी और मां पार्वती की पूजा करती हैं। विवाहित महिलाओं के मायके से उनके लिए सिंधारा भेजा जाता है, जिसमें मिठाई, श्रृंगार का सामान आदि शामिल होता है। मनुस्मृति के अनुसार, विवाह के बाद बेटी को समय-समय पर वस्त्र और आभूषण भेजना कर्तव्य माना जाता है।
सिंधारा में शामिल करने योग्य चीजें
- हरी चूड़ियां: हरियाली तीज पर हरे रंग का विशेष महत्व है। इसलिए, अपनी बेटी के ससुराल हरे रंग की चूड़ियां भेजना न भूलें।
- हरे वस्त्र: हरी रंग की साड़ी, सूट या दुपट्टा भी भेजना चाहिए, क्योंकि यह हरियाली का प्रतीक है।
- श्रृंगार का सामान: नवविवाहित कन्याओं के लिए श्रृंगार का सामान जैसे पायल, बिंदी, बिछिया, सिंदूर आदि भेजना चाहिए।
- मेहंदी: मेहंदी का भी इस अवसर पर विशेष महत्व है, इसे सिंधारा में शामिल करना न भूलें।
- फल और मिष्ठान: सिंधारा में विभिन्न प्रकार के फल और मिठाइयां शामिल की जाती हैं, जो रिश्तों में प्रेम का प्रतीक होती हैं।
- सास के लिए सामग्री: यदि आप पहली बार सिंधारा भेज रही हैं, तो सास के लिए भी सामग्री अवश्य शामिल करें।
सिंधारा में न शामिल करें ये चीजें
कुछ चीजें सिंधारा में शामिल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- नुकीली चीजें: चाकू, कैंची जैसी नुकीली चीजें नहीं रखनी चाहिए।
- काली और सफेद वस्तुएं: काले या सफेद रंग के वस्त्र या सामग्री नहीं भेजनी चाहिए।
- खट्टी चीजें: आचार जैसी खट्टी चीजें भी नहीं भेजनी चाहिए, क्योंकि ये रिश्तों में खटास ला सकती हैं।
