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हरियाली तीज: महत्व और पूजा की परंपरा

हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह 15 अगस्त को होगा। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वे अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए उपवास करती हैं। इस लेख में जानें कि इस व्रत की शुरुआत कैसे हुई और माता पार्वती ने इसे क्यों रखा।
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हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को


हरियाली तीज का व्रत सावन के महीने में मनाया जाता है, जो महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए उपवास करती हैं।


इस वर्ष, हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त को होगा। क्या आप जानते हैं कि इस व्रत की शुरुआत कैसे हुई थी और किसने सबसे पहले इसे रखा था? आइए, इसके बारे में जानते हैं।


भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज का व्रत रखने से विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन शिव जी और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करने से पारिवारिक जीवन में सुख-शांति आती है। कुंवारी कन्याएं भी इस दिन अच्छे जीवनसाथी की कामना करते हुए उपवास करती हैं।


माता पार्वती ने किया था पहला व्रत

पौराणिक कथा के अनुसार, हिमालय के राजा हिमवान की पुत्री पार्वती जी ने सबसे पहले हरियाली तीज का व्रत किया था। उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 107 जन्मों तक कठोर तप किया। अंततः 108वें जन्म में भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की। इसलिए हर साल इस तिथि पर हरियाली तीज मनाई जाती है।


हरियाली तीज का महत्व

हरियाली तीज का व्रत रखने से विवाहित महिलाओं को अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं चाहती हैं कि जैसे भगवान शिव और माता पार्वती का संबंध अटूट है, वैसे ही उनका भी अपने पतियों के साथ संबंध बना रहे। वहीं, कुंवारी कन्याएं इस व्रत के माध्यम से अपने मनचाहे वर की प्राप्ति की कामना करती हैं।