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हरियाली तीज: व्रत की विधि और महत्व

हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त को मनाया जा रहा है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। अविवाहित कन्याएं अपने मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस दिन विशेष पूजा करती हैं। जानें इस पर्व की पूजा विधि, नियम और महत्व, जो दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बनाए रखने में मदद करती है।
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हरियाली तीज का पर्व

आज, 15 अगस्त, शनिवार को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला या फलाहार व्रत करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं अपने मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से संबंधित है। यह माना जाता है कि श्रद्धा से की गई पूजा से दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को पूजा की विधि जानना आवश्यक है।


हरियाली तीज व्रत की विधि

- हरियाली तीज के दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र पहनती हैं। इसके बाद पूजा की तैयारी करते हुए व्रत का संकल्प लें।




- इस अवसर पर मायके से बेटी के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा है, जिसमें चूड़ियां, मिठाई, मेहंदी और श्रृंगार की वस्तुएं शामिल होती हैं। इस दिन मायके से आए वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। हरे रंग को हरियाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन हरे रंग की साड़ी या परिधान पहनने की परंपरा है।




- महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं, जो वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जुड़ा होता है।




- शुभ मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है, जबकि भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाई जाती है।




- इसके बाद हरियाली तीज की कथा का पाठ किया जाता है या सुना जाता है। कई परिवारों में महिलाएं अपनी सास को वस्त्र और सुहाग सामग्री भेंट कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।




- हरियाली तीज पर महिलाएं सामूहिक रूप से गीत-संगीत के साथ पर्व मनाती हैं। झूला झूलने और हाथों में मेहंदी लगाने की परंपरा भी होती है। व्रत का पारण पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।


हरियाली तीज व्रत के नियम

- इस दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। काले, सफेद या भूरे रंग के कपड़े पहनने से बचें।




- व्रत के दौरान पानी या दूध का सेवन न करने की परंपरा है।




- पूजा में वही सामग्री का उपयोग करें, जो मायके से प्राप्त हुई हो।




- व्रत का पारण शुभ मुहूर्त से पहले न करें।




- व्रत वाले दिन महिलाओं को किसी भी प्रकार के विवाद और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए।




- मान्यता के अनुसार, इस रात जागरण कर भजन-कीर्तन के जरिए शिव-पार्वती की आराधना करना चाहिए।