Al-Falah University Chancellor Javad Siddiqui's Judicial Custody Extended Amid NMC Fraud Allegations
Javad Siddiqui's Custody Extended
फरीदाबाद में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली की द्वारका कोर्ट ने उन्हें नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से जुड़े धोखाधड़ी मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखा है। उन्हें अब 19 सितंबर को अदालत में पेश किया जाएगा। सिद्दीकी को शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। यह मामला अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर को NMC की मंजूरी दिलाने के लिए गलत जानकारी और रिकॉर्ड पेश करने से संबंधित है।
जांच एजेंसी के आरोप
जांच एजेंसी का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान संस्थान ने डॉक्टरों और मरीजों से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर किया। आरोप है कि कुछ डॉक्टरों को कागजों पर नियमित कर्मचारी के रूप में पेश किया गया, जबकि वे वास्तव में संस्थान में काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा, मरीजों की संख्या से जुड़े आंकड़ों में भी गड़बड़ी का आरोप है। मेडिकल कॉलेज को NMC के मानकों के अनुरूप दिखाने के लिए रिकॉर्ड तैयार किए गए थे।
कोर्ट की टिप्पणियाँ
न्यायिक हिरासत बढ़ाने के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी की। अदालत ने NMC से धोखाधड़ी को सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना। अदालत ने यह भी आशंका जताई कि सिद्दीकी अपने प्रभाव का उपयोग करके गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं।
ED की जांच और संपत्ति का मामला
अल-फलाह समूह से जुड़े मामलों की जांच केवल मेडिकल कॉलेज की मान्यता तक सीमित नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अप्रैल 2026 में अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और जवाद अहमद सिद्दीकी की लगभग 39.45 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की थीं। इसमें दिल्ली के जामिया नगर में आवासीय संपत्ति, फरीदाबाद में यूनिवर्सिटी कैंपस के पास की जमीन, बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और डिमैट होल्डिंग्स शामिल हैं।
रेड फोर्ट ब्लास्ट की जांच
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम नवंबर 2025 में दिल्ली के रेड फोर्ट इलाके में हुए धमाके की जांच के दौरान भी सामने आया था। जवाद सिद्दीकी को उस समय गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, रेड फोर्ट ब्लास्ट की जांच और मौजूदा NMC धोखाधड़ी का मामला अलग है। ED के अनुसार, अल-फलाह समूह से जुड़े मामलों में जांच अभी भी जारी है।
