Newzfatafatlogo

क्या मुसलमान रक्षाबंधन पर राखी बांध सकते हैं? जानें इस्लाम का दृष्टिकोण

रक्षाबंधन, भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस लेख में, हम जानेंगे कि क्या मुसलमान इस पर्व पर राखी बांध सकते हैं। इस्लाम के दृष्टिकोण के अनुसार, राखी बांधने की अनुमति नहीं है। मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी के अनुसार, यह हिंदू धर्म की परंपरा है। इसके अलावा, 2026 में रक्षाबंधन की तारीख और उस दिन होने वाले चंद्र ग्रहण के बारे में भी जानकारी दी गई है।
 | 

क्या मुसलमान राखी बांध सकते हैं?


रक्षाबंधन, जो भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन लेते हैं। भारत की विविधता में, कई समुदाय इस पर्व के सामाजिक पहलुओं में शामिल होते हैं। इस संदर्भ में, एक सामान्य प्रश्न उठता है: क्या मुसलमान रक्षाबंधन पर राखी बांध सकते हैं?


इस्लामी दृष्टिकोण

इस्लाम के अनुसार, रक्षाबंधन मनाने या राखी बांधने की अनुमति नहीं है। इस्लामी विद्वान मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी के अनुसार, "इस्लाम में राखी बांधने का कोई प्रमाण नहीं है और न ही कुरान या हदीस में इसका उल्लेख है।" उनका कहना है कि राखी हिंदू धर्म की धार्मिक परंपरा है, इसलिए मुसलमानों के लिए इसे बांधना उचित नहीं है। धार्मिक दृष्टिकोण से, मुसलमानों को राखी पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।


इस्लामी कानून की मान्यता

इस्लाम में दूसरे धर्मों के त्योहारों और उनके अनुष्ठानों में भाग लेना उचित नहीं माना जाता। इसे तशब्बुह कहा जाता है, जिसका अर्थ है किसी अन्य धार्मिक समुदाय की परंपराओं का अनुकरण करना। इस्लाम के प्रमुख त्योहार ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा हैं, जबकि रक्षाबंधन हिंदू धर्म की परंपरा का हिस्सा है।


रक्षाबंधन 2026 की तारीख

वर्ष 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक रहेगा।


पूर्णिमा प्रारंभ: 27 अगस्त, सुबह 9:08 बजे
पूर्णिमा समाप्त: 28 अगस्त, सुबह 9:48 बजे
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक


रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी होगा। आंशिक चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार सुबह 6:57 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा, जिसका चरम सुबह 9:43 बजे होगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका धार्मिक सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।