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गोवा चुनाव: कांग्रेस की सहयोगियों की खोज और भाजपा का दबदबा

गोवा में चुनावी माहौल गरम है, जहां कांग्रेस पार्टी सहयोगियों की तलाश में जुटी है। भाजपा का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे छोटी पार्टियों का महत्व कम होता जा रहा है। कांग्रेस के पास वर्तमान में केवल तीन विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 28 विधायक हैं। क्या कांग्रेस आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के साथ तालमेल बनाएगी? जानें इस राजनीतिक हलचल के बारे में।
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गोवा में चुनावी तैयारी

गोवा में आगामी चुनावों की तैयारी जोरों पर है। यदि चुनाव समय पर होते हैं, तो ये अगले साल मार्च में आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, यह भी चर्चा है कि नवंबर में पांच राज्यों में चुनाव हो सकते हैं, जिनमें गोवा भी शामिल है। चुनाव से पहले, कांग्रेस पार्टी गोवा में संभावित सहयोगियों की तलाश कर रही है। हाल ही में, गिरीश चोडनकर को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो पहले तमिलनाडु के प्रभारी थे। इसके अलावा, कांग्रेस ने महाराष्ट्र के प्रमुख नेता माणिकराव ठाकरे को गोवा का प्रभारी बनाया है। अब खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस राज्य में सहयोगियों की खोज में है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि गोवा में कई छोटी पार्टियां हैं, लेकिन भाजपा की ताकत इतनी बढ़ गई है कि छोटी पार्टियों का महत्व कम हो गया है।


भाजपा का प्रभाव और कांग्रेस की स्थिति

गोवा की विधानसभा में कुल 40 सदस्य हैं, जिनमें से भाजपा के पास 28 विधायक हैं। हालांकि, 2022 के चुनाव में भाजपा ने केवल 20 सीटें जीती थीं। इसके बाद, कांग्रेस के 11 में से 8 विधायक भाजपा में शामिल हो गए। 2017 के चुनाव में भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 17 सीटें जीती थीं, फिर भी भाजपा ने सरकार बनाई थी। वर्तमान में, कांग्रेस के पास केवल तीन विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी गोवा फॉरवर्ड पार्टी का एक विधायक है। महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी भाजपा के साथ है, जबकि रिवोल्यूशनरी गोवंस पार्टी गठबंधन से बाहर है। आम आदमी पार्टी के पास दो विधायक हैं। पिछले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 5% से अधिक वोट मिले थे, लेकिन उसे कोई सीट नहीं मिली। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और आरजीपी के साथ तालमेल बनाने की कोशिश करेगी? कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि संसद के मानसून सत्र के बाद राहुल गांधी इस पर निर्णय लेंगे।