भविष्य की डेटा स्टोरेज: DNA तकनीक से डिजिटल फाइलों का संग्रहण
डिजिटल डेटा स्टोरेज का नया युग
आने वाले समय में डिजिटल फाइलों जैसे फोटो और वीडियो को स्टोर करने के तरीके में बदलाव आ सकता है। वर्तमान में, डेटा को सुरक्षित रखने के लिए हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सर्वर और क्लाउड स्टोरेज का उपयोग किया जाता है। लेकिन अब वैज्ञानिक DNA में डिजिटल डेटा स्टोर करने की तकनीक पर काम कर रहे हैं। इस दिशा में भारतीय स्टार्टअप BioCompute सक्रिय है, जिसे 24 वर्षीय अनघा राजेश ने स्थापित किया है.
BioCompute का विस्तार
यह स्टार्टअप भारत में शुरू हुआ है और अब अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में अपने कारोबार का विस्तार करने की योजना बना रहा है। DNA डेटा स्टोरेज तकनीक को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग में वृद्धि हो रही है, जिससे डिजिटल डेटा की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। इस तकनीक में रुचि का कारण यह है कि यह कैसे संभव है कि फोटो और वीडियो को DNA में स्टोर किया जा सके.
DNA में डिजिटल डेटा का संग्रहण
आमतौर पर, डिजिटल डेटा को मोबाइल, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और क्लाउड सर्वर में स्टोर किया जाता है। ये तरीके बड़ी मात्रा में जानकारी को सुरक्षित रखने में सक्षम हैं, लेकिन इसके लिए स्टोरेज डिवाइस, बिजली और डेटा सेंटर जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। डेटा की बढ़ती मात्रा के साथ इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने की चुनौती भी बढ़ती जा रही है.
DNA डेटा स्टोरेज इस समस्या का एक संभावित समाधान हो सकता है। DNA, या डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड, वह अणु है जिसमें जीवों की आनुवंशिक जानकारी होती है। वैज्ञानिक डिजिटल जानकारी को DNA के चार रासायनिक आधारों A, T, G और C के क्रम में बदलकर उसमें स्टोर करने की तकनीक विकसित कर रहे हैं.
डेटा स्टोरेज की प्रक्रिया
इस प्रक्रिया में, डिजिटल फाइल को पहले एक विशेष कोड में परिवर्तित किया जाता है। फिर उस कोड के अनुसार DNA तैयार किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर, DNA को पढ़कर मूल डिजिटल जानकारी पुनः प्राप्त की जा सकती है। इस प्रकार, सिद्धांत रूप में फोटो, वीडियो, दस्तावेज और अन्य डिजिटल फाइलें भी DNA में स्टोर की जा सकती हैं.
अनघा राजेश और BioCompute
अनघा राजेश ने 2024 में BioCompute की स्थापना की थी। यह कंपनी DNA के माध्यम से डिजिटल डेटा स्टोर करने की तकनीक विकसित करने पर काम कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, स्टार्टअप ने प्रारंभिक अनुसंधान के दौरान हजारों प्रयोग किए और अपना प्रोटोटाइप भी तैयार किया है.
कंपनी को WTF Fund, Grad Capital और 1517 Fund जैसे निवेशकों से 5 करोड़ रुपये से अधिक की फंडिंग प्राप्त हुई है। यह प्रारंभिक निवेश कंपनी को अपनी तकनीक को विकसित करने और अनुसंधान को आगे बढ़ाने में सहायता कर सकता है.
हालांकि, किसी तकनीक का प्रोटोटाइप तैयार करना और उसे बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से लागू करना अलग-अलग चरण हैं। DNA में डेटा लिखने, उसे सुरक्षित रखने और आवश्यकता पड़ने पर तेजी से पढ़ने की प्रक्रिया को किफायती बनाना अभी भी एक बड़ी तकनीकी चुनौती है.
