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सौर ऊर्जा में नई क्रांति: वैज्ञानिकों ने विकसित की अनोखी तकनीक

वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई तकनीक विकसित की है, जिसे मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल कहा जाता है। यह तकनीक सूरज की रोशनी को लंबे समय तक संग्रहित करने में सक्षम है, जिससे भविष्य में बिजली और गर्मी के लिए भारी बैटरियों पर निर्भरता कम हो सकती है। जानें इस तकनीक के कार्यप्रणाली, ऊर्जा संग्रहण क्षमता और संभावित उपयोग के बारे में।
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सौर ऊर्जा में नई उपलब्धि


नई दिल्ली: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस विकास के माध्यम से भविष्य में बिजली या गर्मी के लिए भारी बैटरियों पर निर्भरता कम हो सकती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सांता बारबरा (UCSB) के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक का निर्माण किया है, जो सूरज की रोशनी को एक मॉलिक्यूल में लंबे समय तक सुरक्षित रखने की क्षमता रखती है।


विशेष तकनीक का परिचय

इस नई तकनीक को मॉलिक्यूलर सोलर थर्मल (Molecular Solar Thermal) कहा जाता है। इसमें वैज्ञानिकों ने एक विशेष ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल तैयार किया है, जो सूर्य की ऊर्जा को केमिकल बॉंड्स के रूप में अपने अंदर कैद कर लेता है। आवश्यकता पड़ने पर, यह ऊर्जा गर्मी के रूप में पुनः प्राप्त की जा सकती है।


इस तकनीक का कार्यप्रणाली

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस मॉलिक्यूल की संरचना मानव डीएनए से प्रेरित है। जब इस पर सूर्य की यूवी किरणें पड़ती हैं, तो इसका आकार बदल जाता है और यह स्प्रिंग की तरह ऊर्जा को अपने अंदर संचित कर लेता है। यह बदली हुई अवस्था कई वर्षों तक स्थिर रह सकती है। इसके बाद, हल्की गर्मी या विशेष रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से यह अपने मूल रूप में लौट आता है और संग्रहित ऊर्जा को गर्मी के रूप में छोड़ देता है।


ऊर्जा संग्रहण की क्षमता

ऊर्जा संग्रहण की क्षमता के मामले में यह तकनीक पारंपरिक बैटरियों से बेहतर साबित हो सकती है। एक किलोग्राम लीथियम बैटरी लगभग 0.9 मेगाजूल ऊर्जा संग्रहित कर सकती है, जबकि समान मात्रा में यह नया मॉलिक्यूल लगभग 1.6 मेगाजूल ऊर्जा अपने भीतर सुरक्षित रख सकता है। इसका मतलब है कि इसकी क्षमता सामान्य लीथियम बैटरी की तुलना में लगभग दोगुनी है।


भविष्य में उपयोग की संभावनाएं

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक का उपयोग घरों की छतों पर लगे सोलर सिस्टम में किया जा सकता है। दिनभर सूर्य की ऊर्जा को लिक्विड के रूप में संग्रहित कर रात के समय घरों को गर्म रखने, पानी गर्म करने और अन्य हीटिंग जरूरतों के लिए इसका उपयोग किया जा सकेगा। इसके अलावा, कैंपिंग और दूरदराज के क्षेत्रों में ऑफ-ग्रिड हीटिंग सिस्टम के रूप में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पर्यावरण के अनुकूल सामग्री है, जिसे बार-बार रीचार्ज और रीसायकल किया जा सकता है, जिससे लंबे समय तक इसका उपयोग संभव होगा।