चीन ने AI चैटबॉट्स पर लागू किए सख्त नियम: भावनात्मक जुड़ाव पर रोक
चीन का नया नियम: AI चैटबॉट्स पर सख्ती
नई दिल्ली: आजकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग केवल सवालों के उत्तर देने तक सीमित नहीं रह गया है। कई लोग चैटबॉट्स के साथ दोस्ताना, पार्टनर या यहां तक कि परिवार के सदस्य की तरह बातचीत करने लगे हैं। इस बढ़ते चलन को ध्यान में रखते हुए, चीन ने ऐसे चैटबॉट्स के लिए कड़े नियम लागू किए हैं, जो यूजर्स के साथ गहरे भावनात्मक संबंध बनाने का प्रयास करते हैं। 15 जुलाई से, चीन में उन AI चैटबॉट्स के लिए नए दिशा-निर्देश लागू हुए हैं, जो मानव जैसी बातचीत करते हैं और भावनात्मक सहारा प्रदान करते हैं। इन नियमों का उद्देश्य AI पर बढ़ती भावनात्मक निर्भरता को कम करना है।
नए नियमों के अनुसार, चैटबॉट्स को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे इंसान नहीं हैं। इसके अलावा, हर दो घंटे में यूजर को यह याद दिलाना होगा कि वह कितनी देर से बातचीत कर रहा है। अब कोई भी चैटबॉट यूजर को खुद पर निर्भर बनाने वाली बातें नहीं कह सकेगा और न ही वह खुद को यूजर का सबसे करीबी साथी बताने की अनुमति होगी। आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने वाले संदेश भी पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।
बच्चों के लिए सख्त नियम
बच्चों के लिए नियम और भी कड़े हैं। 14 साल से कम उम्र के बच्चे केवल माता-पिता की अनुमति से ही मानव जैसी बातचीत वाले AI का उपयोग कर सकेंगे। वहीं, 18 साल से कम उम्र के बच्चों को AI के साथ किसी भी करीबी रिश्ते जैसे कि बॉयफ्रेंड, गर्लफ्रेंड या पति-पत्नी के रूप में बातचीत करने की अनुमति नहीं है। जो कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन पर 2 लाख युआन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। कुछ प्रमुख टेक कंपनियों ने तो नियम लागू होने से पहले ही अपने AI असिस्टेंट्स से कम्पैनियन फीचर हटा दिए हैं।
AI साथी या अकेलापन?
रिसर्च में भी चिंता व्यक्त की गई है। एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों के पास कम दोस्त या करीबी रिश्तेदार होते हैं, वे AI चैटबॉट्स का अधिक उपयोग करते हैं। चैटबॉट्स के अधिक उपयोग को अकेलेपन से भी जोड़ा गया है। चीन के इस कदम ने एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है। सवाल यह है कि लोगों को भावनात्मक नुकसान से बचाने के लिए कितने नियम आवश्यक हैं, और निजी जीवन में सरकार का हस्तक्षेप कितना होना चाहिए।
