भारत में सैटेलाइट फोन: नियम और उपयोग की जानकारी
सैटेलाइट फोन का महत्व
नई दिल्ली: भारत में ऐसे क्षेत्र जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां सैटेलाइट फोन अत्यधिक उपयोगी साबित होते हैं। चाहे पहाड़ हों, जंगल, रेगिस्तान, समुद्र या प्राकृतिक आपदाएं, जब सामान्य नेटवर्क काम नहीं करता, तब ये फोन सीधे सैटेलाइट से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। यही कारण है कि इनका उपयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाता है। हालांकि, भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग सामान्य मोबाइल फोन की तरह सरल नहीं है।
बीएसएनएल का नया सैटेलाइट फोन
हाल ही में, सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने लगभग 1.34 लाख रुपये की कीमत वाला नया सैटेलाइट फोन पेश किया है। इसके बाद लोगों की रुचि फिर से बढ़ गई है कि भारत में इन फोन को खरीदने और उपयोग करने के लिए क्या नियम हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सैटेलाइट फोन पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं हैं, लेकिन इनके उपयोग पर सरकारी नियंत्रण है।
अनुमति का ध्यान रखें
भारत में सैटेलाइट फोन का उपयोग Telecommunications Act, 2023 और Indian Wireless Telegraphy Act, 1933 के तहत नियंत्रित होता है। किसी भी व्यक्ति को सैटेलाइट फोन रखने या उपयोग करने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) से लाइसेंस या नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त करना आवश्यक है। इसलिए इसे सामान्य मोबाइल फोन की तरह खरीदकर तुरंत उपयोग करना उचित नहीं है।
बिना अनुमति उपयोग करने पर कानूनी कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बिना आवश्यक अनुमति के सैटेलाइट फोन भारत लाता है या इसका उपयोग करता है, तो कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में फोन जब्त होने के साथ-साथ जुर्माना और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी हो सकती है। यह नियम केवल भारतीय नागरिकों पर ही नहीं, बल्कि भारत आने वाले विदेशी यात्रियों पर भी लागू होते हैं।
सभी विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क को मंजूरी नहीं
वर्तमान में, बीएसएनएल के माध्यम से Inmarsat नेटवर्क आधारित Global Satellite Phone Service को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी मिली है। वहीं, Thuraya, Iridium और अन्य विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क भारत में अधिकृत नहीं हैं। इसलिए इन नेटवर्क पर चलने वाले फोन का उपयोग बिना सरकारी मंजूरी के नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि केवल फोन खरीदना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके नेटवर्क की अनुमति भी आवश्यक है।
सुरक्षा कारणों से सख्त नियम
सैटेलाइट फोन पर सख्ती का मुख्य कारण राष्ट्रीय सुरक्षा है। ये डिवाइस सामान्य मोबाइल फोन की तरह मोबाइल टावर पर निर्भर नहीं होते, बल्कि सीधे सैटेलाइट से जुड़े होते हैं। ऐसे संचार की निगरानी पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क की तुलना में अधिक कठिन होती है। 2008 के मुंबई आतंकी हमले में आतंकियों द्वारा Thuraya सैटेलाइट फोन के उपयोग के बाद, इन सेवाओं के लिए सरकारी नियम और भी सख्त कर दिए गए हैं।
