बच्चों को प्रदर्शन के लिए मजबूर करना: क्या यह सही है?
बच्चों के सामने प्रदर्शन का दबाव
नई दिल्ली: यदि आप अपने बच्चे से रिश्तेदारों या मेहमानों के सामने कविता सुनाने, गाने या नृत्य करने के लिए कहते हैं, तो आपको इस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। पेरेंटिंग कोच डॉ. खुशबू के अनुसार, बार-बार ऐसा करने से बच्चे में 'पीपल प्लीजिंग' की आदत विकसित हो सकती है। इसलिए माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों पर प्रदर्शन का दबाव न डाला जाए।
बच्चों की भावनाओं का सम्मान करें
कई बच्चे ऐसे समय में असहज महसूस करते हैं। कुछ बच्चे शर्म के कारण चुप हो जाते हैं, जबकि कुछ मजबूरी में प्रदर्शन करते हैं। डॉ. खुशबू का कहना है कि बच्चों को केवल दूसरों का मनोरंजन करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, "आपका बच्चा कोई एंटरटेनमेंट चैनल नहीं है।" माता-पिता को बच्चों की भावनाओं और पसंद का सम्मान करना चाहिए।
माता-पिता का दबाव
डॉ. खुशबू के अनुसार, कई बार माता-पिता मेहमानों के सामने बच्चों से परफॉर्म करवाते हैं ताकि लोग उनकी तारीफ करें। लेकिन यदि बच्चा शर्माता है या मना कर देता है, तो कुछ माता-पिता उसे डांट देते हैं या मजाक उड़ाते हैं। ऐसा करना गलत है। माता-पिता को बच्चों की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना चाहिए।
परफॉर्मेंस एंग्जायटी का खतरा
डॉ. खुशबू का कहना है कि जब बच्चों को बार-बार दूसरों के सामने प्रदर्शन करने के लिए कहा जाता है, तो यह आदत उन्हें परफॉर्मेंस एंग्जायटी और आत्मविश्वास की कमी का शिकार बना सकती है। बच्चे सोचने लगते हैं कि उनकी अहमियत तभी है जब वे दूसरों को खुश करें।
बच्चों की भावनाओं का महत्व
डॉ. खुशबू का कहना है कि अच्छे माता-पिता अपने बच्चों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। यदि कोई मेहमान बच्चे से कुछ करने के लिए कहता है और उसका मन नहीं है, तो माता-पिता को प्यार से कहना चाहिए, "अभी उसका मन नहीं है, जब उसका मन होगा तो वह खुद कर लेगा।" इससे बच्चे पर बेवजह का दबाव नहीं पड़ता और वह सुरक्षित महसूस करता है।
