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PGIMER चंडीगढ़ में खिचड़ी: स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष डाइट

PGIMER चंडीगढ़ में खिचड़ी अब केवल एक साधारण भोजन नहीं है, बल्कि यह मरीजों के उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। अस्पताल का डाइटेटिक्स विभाग मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विशेष खिचड़ी तैयार करता है। जानें कि कैसे विभिन्न प्रकार की खिचड़ी मरीजों की सेहत में सुधार लाने में मदद करती है और डाइटेटिक्स टीम की भूमिका क्या है। इस लेख में खिचड़ी बनाने के सुझाव भी दिए गए हैं, जो घर पर भी अपनाए जा सकते हैं।
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PGIMER चंडीगढ़ में खिचड़ी का महत्व

PGIMER चंडीगढ़ खिचड़ी डाइट: उत्तर भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ में भर्ती मरीजों के लिए खिचड़ी अब केवल साधारण भोजन नहीं रह गई है, बल्कि यह उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। अस्पताल का डाइटेटिक्स विभाग मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति और पाचन क्षमता के अनुसार विशेष चिकित्सा खिचड़ी तैयार करता है।


खिचड़ी के प्रकार

चंडीगढ़ PGIMER की रसोई में सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त मरीजों के लिए मूंग छिलका दाल की खिचड़ी बनाई जाती है। छिलके वाली मूंग दाल में फाइबर, फोलिक एसिड और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।


वहीं, उल्टी, दस्त और गंभीर गैस्ट्रो समस्याओं से पीड़ित मरीजों के लिए लो-फाइबर डाइट की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों के लिए बिना छिलके वाली मूंग दाल से खिचड़ी बनाई जाती है। लेबर रूम में भर्ती महिलाओं और सर्जरी से उबर रहे मरीजों के लिए ताजा पनीर और मौसमी सब्जियों के साथ ऊर्जा से भरपूर डाइट दी जाती है।


डाइटेटिक्स टीम की भूमिका

डॉक्टरों द्वारा दी गई दवाएं तभी प्रभावी होती हैं जब मरीज को पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन मिले। पीजीआई के डाइटेटिक्स विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मिलकर हर वार्ड के मरीजों का डाइट चार्ट रोजाना मॉनिटर करते हैं।


डॉ. नैन्सी साहनी के अनुसार, यदि किसी मरीज की रिकवरी धीमी है, तो उसकी खिचड़ी में दाल का घनत्व और पनीर की मात्रा बढ़ाई जाती है, जिससे अतिरिक्त कैलोरी और एमिनो एसिड मिल सके। यह प्रणाली मरीज की स्वास्थ्य स्थिति को सुधारने और अस्पताल में भर्ती रहने के समय को कम करने में सहायक है।


खिचड़ी बनाने के सुझाव

उत्तर भारत में अक्सर पेट खराब होने पर केवल सफेद चावल और थोड़ी दाल वाली पतली खिचड़ी बनाई जाती है। चीफ डाइटिशियन ने सलाह दी है कि घर पर भी पीजीआई की खिचड़ी बनाने की विधि अपनाई जानी चाहिए, जिसमें चावल का अनुपात कम और दाल व सब्जियों का अनुपात अधिक हो।


बुखार या संक्रमण के दौरान शरीर को प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है। पेट की स्थिति के अनुसार छिलके वाली या बिना छिलके वाली दाल का चयन करें और मरीज की भूख और पाचन के अनुसार उसमें घी, जीरा या कद्दूकस किया हुआ पनीर मिलाएं। #PGIMERChandigarh #HealthTips #NutritionDiet