टाइफाइड मैरी: एक खतरनाक बैक्टीरिया की कहानी
मैरी मैलन का प्रारंभिक जीवन
मैरी मैलन का जन्म 1869 में आयरलैंड में हुआ था, और वह 1884 के आस-पास न्यूयॉर्क पहुंची। उसे खाना बनाने का बहुत शौक था, और उसने जल्दी ही न्यूयॉर्क के धनी परिवारों में कुक के रूप में काम करना शुरू कर दिया। हालांकि, वह इस बात से अनजान थी कि उसके शरीर में एक जानलेवा बैक्टीरिया, सालमोनेला टाइफी, मौजूद था, जो दूसरों के लिए घातक साबित हो सकता था।
टाइफाइड का प्रकोप
1906 में, न्यूयॉर्क के एक अमीर बैंकर चार्ल्स हेनरी वॉरेन ने लॉन्ग आईलैंड में एक घर किराए पर लिया और मैरी को अपने परिवार के लिए खाना पकाने का काम सौंपा। लेकिन 27 अगस्त से 3 सितंबर के बीच, घर में मौजूद 11 लोगों में से 6 गंभीर रूप से बीमार हो गए, जिन्हें टाइफाइड का पता चला।
जॉर्ज सोबर की जांच
उस समय टाइफाइड एक खतरनाक बीमारी मानी जाती थी, जिससे 10% मरीजों की मौत हो जाती थी। हेनरी वॉरेन ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए जॉर्ज सोबर नामक एक सेनेटरी इंजीनियर को नियुक्त किया। सोबर ने अपनी जांच में पाया कि मैरी मैलन के पिछले काम के रिकॉर्ड में, 8 घरों में से 7 में टाइफाइड के मामले सामने आए थे।
हिरासत और क्वारंटाइन
मार्च 1907 में, सोबर ने मैरी से सैंपल देने का अनुरोध किया, लेकिन उसने इनकार कर दिया। अंततः पुलिस की मदद से उसे हिरासत में लिया गया और उसके सैंपल लिए गए, जो पॉजिटिव आए। न्यूयॉर्क में उस वर्ष लगभग 3,000 लोग टाइफाइड से प्रभावित हुए, और मैरी को अलग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
कानूनी लड़ाई और पुनरुत्थान
1909 में, मैरी ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ मुकदमा दायर किया। दो साल के क्वारंटाइन के दौरान, उसके 120 सैंपल पॉजिटिव आए। अंततः उसे रिहा किया गया, लेकिन उसने फिर से खाना बनाना शुरू कर दिया और कई लोगों को संक्रमित कर दिया। उसे फिर से गिरफ्तार किया गया और नॉर्थ ब्रदर आईलैंड में भेज दिया गया।
मैरी मैलन का अंत
मैरी ने अपने जीवन के 26 साल उस सुनसान द्वीप पर बिताए। 1932 में, उसे लकवा मार गया और 1938 में उसकी मृत्यु हो गई। उसके शरीर का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें टाइफाइड के बैक्टीरिया पाए गए। हालांकि, कुछ का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग ने नैतिक विवादों से बचने के लिए पोस्टमार्टम की बात की अफवाह फैलाई।
