आर्थराइटिस से बचाव के उपाय: जोड़ों की सेहत के लिए जरूरी टिप्स
जोड़ों के दर्द से बचने के उपाय
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, कई स्वास्थ्य समस्याएं सामने आने लगती हैं। यदि आपको जोड़ों में दर्द या चलने में कठिनाई का अनुभव होता है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है। यह आर्थराइटिस, जिसे गठिया भी कहा जाता है, के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं। यह एक ऐसी बीमारी है जो जोड़ों को प्रभावित करती है और इसका कारण अधिक वजन, उम्र का बढ़ना या पुराने जोड़ों की चोट हो सकता है।
यदि आपके परिवार में किसी को आर्थराइटिस की समस्या रही है, तो आपके लिए भी इसका खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, आर्थराइटिस को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, लेकिन वजन को नियंत्रित करके, नियमित शारीरिक गतिविधि करके और जोड़ों की चोटों से बचकर इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस लेख में, हम आपको इस समस्या से बचने के कुछ उपाय बताएंगे।
शारीरिक गतिविधि को बनाए रखें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शारीरिक गतिविधि न केवल आर्थराइटिस के जोखिम को कम करती है, बल्कि पहले से मौजूद आर्थराइटिस के लक्षणों को भी नियंत्रित कर सकती है।
साइकिल चलाना, तेज चलना, तैराकी और हल्के व्यायाम करने से जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है। वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि और दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियों की सलाह दी जाती है।
वजन को नियंत्रित करें
संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के माध्यम से वजन को बढ़ने से रोका जा सकता है।
यदि किसी व्यक्ति का वजन अधिक है, तो 5-10% वजन कम करना भी आर्थराइटिस से संबंधित दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई को कम करने में मदद कर सकता है।
जोड़ों की चोट को हल्के में न लें
यदि आपके घुटने या किसी अन्य जोड़ में चोट लगी है, तो यह भविष्य में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ा सकती है। आमतौर पर गिरने, खेलते समय या काम के दौरान एक ही जोड़ पर बार-बार दबाव डालने से यह खतरा बढ़ता है। इसलिए व्यायाम करते समय सही तकनीक का पालन करना, चोट लगने पर आराम करना और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक है। बार-बार होने वाले जोड़ के दर्द को नजरअंदाज करने की गलती न करें।
