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कुत्ते के काटने पर घरेलू नुस्खों से बचें, जानें क्या करें

कुत्ते के काटने की स्थिति में घरेलू नुस्खों का सहारा लेना जानलेवा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, त्वरित प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सहायता आवश्यक है। जानें कि कुत्ते के काटने पर आपको क्या करना चाहिए, कैसे घाव को साफ करना है, और कब रेबीज वैक्सीनेशन कराना है। इस लेख में हम आपको चार महत्वपूर्ण कदम बताएंगे, जिन्हें आपको तुरंत अपनाना चाहिए।
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नई दिल्ली में कुत्ते के काटने की घटनाएं

नई दिल्ली: सुबह की सैर या रास्ते में चलते समय आवारा या पालतू कुत्ते का हमला किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे मामलों में लोग अक्सर पारंपरिक घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं, जैसे घाव पर हल्दी लगाना, सरसों का तेल डालना, मिर्च लगाना या कपड़े से कसकर बांधना। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते के काटने पर ये उपाय जानलेवा हो सकते हैं। प्रसिद्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मीर के अनुसार, घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद करना मरीज की जान को खतरे में डाल सकता है। रेबीज एक घातक वायरस है, और इससे बचने का एकमात्र तरीका त्वरित प्राथमिक उपचार और समय पर चिकित्सा सहायता है।


घाव पर हल्दी, तेल या मिट्टी लगाने से क्यों बचें?

भारतीय घरों में चोट लगने पर हल्दी या तेल का उपयोग प्राथमिक उपचार के रूप में किया जाता है, लेकिन कुत्ते के काटने की स्थिति में यह प्रक्रिया बेहद खतरनाक हो सकती है। डॉ. मीर के अनुसार, इन चीजों को लगाने से घाव में मौजूद कुत्ते की लार और वायरस अंदर ही बंद हो जाते हैं। इसके अलावा, इन उपायों से घाव में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, और अस्पताल पहुंचने में देरी से वायरस को शरीर में फैलने का समय मिल जाता है। घाव को कसकर पट्टी से बांधना या खुद से टांके लगाने की कोशिश करना भी सख्त मना है।


कुत्ता काटने पर तुरंत अपनाएं ये 4 कदम

1. घाव को बहते पानी और साबुन से 15 मिनट तक धोएं: काटने के तुरंत बाद पीड़ित को नल के नीचे ले जाकर घाव को सामान्य साबुन और तेज बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोते रहें। इससे घाव में जमा कुत्ते की लार और रेबीज वायरस का लोड बाहर निकल जाता है।


2. सही एंटीसेप्टिक का उपयोग करें: पानी से धोने के बाद घाव को साफ कपड़े से हल्के हाथों से सुखाएं। फिर उस पर डेटॉल, सैवलॉन या पोविडोन आयोडीन जैसे मेडिकल एंटीसेप्टिक लगाएं। घाव को खुला रखें और उस पर कोई घरेलू पदार्थ न लगाएं।


3. उसी दिन रेबीज वैक्सीनेशन शुरू करें: काटने के बाद बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचें। डॉक्टर घाव की गंभीरता के अनुसार रेबीज रोधी टीके का शेड्यूल तय करेंगे। टीके की पहली खुराक उसी दिन लगवाना अनिवार्य है।


4. गंभीर घाव पर इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) जरूरी: यदि कुत्ते ने त्वचा को गहराई से काटा है, तो यह अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर घाव के आसपास रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) का इंजेक्शन लगाते हैं, जो वायरस को तुरंत निष्क्रिय करता है।


कुत्ते पर नजर रखने के चक्कर में इलाज न टालें

कई लोग कुत्ते को 10 दिनों तक सामान्य देखकर अपना इलाज रोक देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते की निगरानी करना पशु विशेषज्ञों का काम है, इंसान को अपना इलाज उसी दिन शुरू कर देना चाहिए। रेबीज के लक्षण एक बार प्रकट होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है और यह लगभग शत-प्रतिशत जानलेवा होता है। इसलिए लक्षण उभरने या घाव भरने का इंतजार न करें और पहले ही दिन से पूरा मेडिकल प्रोटोकॉल पूरा करें।